Kanpur: नौ राज्यों में फैले फर्जी डिग्री रैकेट का खुलासा, चार गिरफ्तार

कानपुर. कमिश्नरेट पुलिस ने किदवई नगर क्षेत्र में संचालित एक संगठित फर्जी शैक्षणिक प्रमाणपत्र गिरोह का भंडाफोड़ किया है। कार्रवाई में चार आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि पांच से अधिक संदिग्ध फरार बताए गए हैं।
पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल के अनुसार, गिरोह देश के कम से कम नौ राज्यों में सक्रिय था और 14 विश्वविद्यालयों तथा उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के नाम पर नकली डिग्री, अंकपत्र, प्रोविजनल एवं माइग्रेशन प्रमाणपत्र तैयार कर रहा था। प्रारंभिक जांच में करोड़ों रुपये के अवैध लेन-देन के संकेत मिले हैं।
‘शैल ग्रुप ऑफ एजुकेशन’
जांच में पाया गया कि किदवई नगर में ‘शैल ग्रुप ऑफ एजुकेशन’ के नाम से एक कार्यालय संचालित किया जा रहा था। यहीं से बिना परीक्षा दिए डिग्री दिलाने का प्रलोभन देकर युवाओं से धन वसूला जाता था। गिरोह उन्नत प्रिंटिंग तकनीक, फर्जी मोहर, काल्पनिक पंजीकरण संख्या और विश्वविद्यालयों के प्रारूप का उपयोग कर दस्तावेज तैयार करता था, जिससे प्रारंभिक सत्यापन में कई बार प्रमाणपत्र वास्तविक प्रतीत होते थे।
पुलिस के अनुसार, इन दस्तावेजों का उपयोग नौकरी प्राप्त करने, पदोन्नति और उच्च शिक्षा में प्रवेश के लिए किया जा रहा था। अब तक दर्जनों, संभवतः सैकड़ों लोगों को ऐसे प्रमाणपत्र उपलब्ध कराए जाने की आशंका है।
गिरफ्तारी और आगे की कार्रवाई
गिरफ्तार आरोपितों में शैलेंद्र कुमार (किदवई नगर), नागेंद्र (कौशांबी), जोगेंद्र (दिल्ली) और अश्वनी कुमार (शुक्लागंज) शामिल हैं। फरार व्यक्तियों में रवि उर्फ बनी (हैदराबाद), विनीत (गाजियाबाद), शुभम दुबे (छतरपुर), मयंक भारद्वाज (मणिपुर) और शेखू उर्फ ताबीज (कानपुर) समेत अन्य की तलाश जारी है।
पुलिस का कहना है कि पूछताछ के दौरान नेटवर्क से जुड़े अन्य बिचौलियों और लाभार्थियों की पहचान की जा रही है। जिन लोगों ने इन फर्जी प्रमाणपत्रों का उपयोग किया है, उनके विरुद्ध भी विधिक कार्रवाई की जाएगी।
कमिश्नरेट पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी प्रकार की अवैध शैक्षणिक डिग्री दिलाने के दावे पर भरोसा न करें और संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल निकटतम थाने या पुलिस नियंत्रण कक्ष को दें।

