UGC Act की बहाली की मांग को लेकर प्रदर्शन, भेदभाव के मुद्दे भी गूंजे

प्रयागराज (आलोक गुप्ता). जिलाधिकारी कार्यालय प्रयागराज परिसर में यूजीसी एक्ट 2026 की बहाली की मांग को लेकर एक समूह द्वारा शांतिपूर्ण प्रदर्शन आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम राज्यव्यापी आह्वान के तहत दोपहर 12 बजे आयोजित किया गया, जिसमें शिक्षण संस्थानों में कथित जातीय भेदभाव और उत्पीड़न के मुद्दे भी उठाए गए।
प्रदर्शन का नेतृत्व डॉ. कमल उसरी ने किया। उन्होंने कहा कि यूजीसी एक्ट 2026 (UGC Act) की बहाली का प्रश्न सामाजिक न्याय से जुड़ा विषय है। वक्ताओं ने दावा किया कि यह अधिनियम विभिन्न घटनाओं और न्यायालयी प्रक्रियाओं के बाद अस्तित्व में आया।
उन्होंने रोहित वेमुला, डॉ. पायल तड़वी, दर्शन सोलंकी, मुथुकृष्णन, रश्मि, पुलायला राजू, मदारी वेंकटेश, सेंथिल कुमार, फातिमा लतीफ और एंजेल चकमा सहित कई छात्रों के मामलों का उल्लेख किया। साथ ही रोहित वेमुला की माता राधिका वेमुला और डॉ. पायल तड़वी की माता आबेदा तड़वी द्वारा दायर जनहित याचिकाओं तथा सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों और 31 सदस्यीय संसदीय समिति की सिफारिशों का संदर्भ दिया गया।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि अधिनियम पर न्यायालय द्वारा दिए गए स्थगनादेश के पीछे केंद्र सरकार की कमजोर पैरवी जिम्मेदार है। उन्होंने मांग की कि अधिनियम (UGC Act) की बहाली तक आंदोलन जारी रहेगा तथा इस मुद्दे पर गिरफ्तार किए गए समर्थकों को रिहा किया जाए।
प्रदर्शन में अधिवक्ता अशोक धुरिया, धीरेन्द्र यादव, कमलेश पाल, अन्नू सिंह, लवकुश गौड़, सुमित गौतम, अमित गौड़, अनिल, आनंद, अजय कुमार, विकास स्वरूप, आशीष, पार्थ, रिया, सत्यम, सूर्या, मनीष कुमार, सुनील, शशांक, बिशंभर पटेल, अश्विनी यादव और अमित विपक्ष सहित अन्य लोग शामिल हुए। इसके अतिरिक्त बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं, सेवानिवृत्त अधिकारी-कर्मचारी, अधिवक्ता, बुद्धिजीवी और सामाजिक कार्यकर्ता भी उपस्थित रहे।
आयोजकों के अनुसार प्रयागराज में सक्रिय विभिन्न एससी/एसटी, ओबीसी और बहुजन समाज से जुड़े छात्र संगठनों तथा कुछ राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं ने भी कार्यक्रम में भाग लेकर समर्थन व्यक्त किया। उन्होंने भविष्य में भी इस मुद्दे पर सहयोग जारी रखने की बात कही।

