Magh Mela 2026: 21 करोड़ आस्थावानों ने त्रिवेणी में लगाई डुबकी

प्रयागराज (आलोक गुप्ता). पावन त्रिवेणी के तट पर आयोजित माघ मेला-2025 ने आस्था, अनुशासन और प्रशासनिक कुशलता का ऐसा अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया है, जिसने अब तक के सभी माघ मेलों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन, सतत निगरानी और स्पष्ट प्राथमिकताओं के परिणामस्वरूप यह आयोजन न केवल “मिनी कुंभ” के रूप में प्रतिष्ठित हुआ, बल्कि संस्कृति-आधारित सुशासन के एक प्रभावी मॉडल के रूप में भी उभरकर सामने आया है।
तीन जनवरी से शुरू हुआ स्नान
पौष पूर्णिमा स्नान पर्व के साथ 3 जनवरी से प्रारंभ हुए माघ मेले में अब तक संपन्न हुए पांच प्रमुख स्नान पर्वों के दौरान 21 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने पवित्र गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम में आस्था की डुबकी लगाई। मेला प्रशासन के अनुसार अभी महाशिवरात्रि का अंतिम स्नान पर्व शेष है, जबकि 15 फरवरी को माघ मेले के सकुशल समापन की तैयारियां युद्धस्तर पर की जा रही हैं।
सामाजिक समरसता का जीवंत मंच
माघ मेला अधिकारी ऋषिराज ने बताया कि इस वर्ष माघ मेला केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह सामाजिक समरसता, आत्मानुशासन और सांस्कृतिक चेतना का जीवंत मंच बन गया। पूर्ण अनुशासन के साथ श्रद्धालुओं का विशाल जनसैलाब संगम तट पर पहुंचा और सनातन संस्कृति की सशक्त छवि प्रस्तुत करते हुए अपने संकल्पों को पूर्ण कर आगे बढ़ा।
संस्कृति आधारित सुशासन का ब्लूप्रिंट
संगमनगरी प्रयागराज में आयोजित माघ मेला भारत की परंपरागत संस्कृति और आधुनिक प्रशासनिक व्यवस्था के समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभरा है। यह आयोजन इस बात का प्रमाण है कि जब शासन व्यवस्था सांस्कृतिक मूल्यों पर आधारित होती है, तो विशाल जनसमूह का प्रबंधन भी सहज, सुरक्षित और अनुशासित ढंग से किया जा सकता है।
कल्पवास: आत्मसंयम का प्रतीक
यदि कुंभ और महाकुंभ को 13 अखाड़ों के वैभव का महाआयोजन माना जाता है, तो माघ मेला त्रिवेणी की रेती पर एक माह तक निवास करने वाले कल्पवासियों की साधना और संयम का प्रतीक है। इस वर्ष 5 लाख से अधिक कल्पवासियों ने संगम तट पर कल्पवास किया। प्रशासन की ओर से उनके लिए आवास, स्वच्छता, चिकित्सा, जल, विद्युत और सुरक्षा सहित सभी आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित की गईं।
पहली बार प्रयागवाल नगर स्थापित
कल्पवासियों को परंपरागत रूप से तीर्थ पुरोहितों द्वारा बसाया गया। इस वर्ष पहली बार तीर्थ पुरोहितों के लिए अलग से ‘प्रयागवाल नगर’ की स्थापना की गई, जिससे व्यवस्था और अधिक सुव्यवस्थित हुई। जाति और उप-जाति के सभी भेदों को त्यागकर कल्पवासियों ने मां गंगा के पावन जल में स्नान कर अपने धार्मिक संकल्प पूर्ण किए।
800 हेक्टेयर तक फैला Magh Mela
इस वर्ष माघ मेला क्षेत्र का विस्तार लगभग 800 हेक्टेयर तक किया गया। श्रद्धालुओं की सुविधा और सुगम आवागमन के लिए मेला क्षेत्र को सात सेक्टरों में विभाजित किया गया तथा नौ पांटून पुलों का निर्माण कराया गया। पहली बार मेला क्षेत्र में गोल्फ कार्ट सेवा शुरू की गई, जिससे बसंत पंचमी तक 35 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने लाभ उठाया।
श्रद्धालुओं के लिए बाइक टैक्सी सेवा
इसके अतिरिक्त शहर के विभिन्न हिस्सों से मेला क्षेत्र तक पहुंचने के लिए बाइक टैक्सी सेवा शुरू की गई, जिससे माघ पूर्णिमा तक तीन लाख से अधिक श्रद्धालु लाभान्वित हुए। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पहली बार ‘मेला सेवा ऐप’ विकसित किया गया, जिससे जानकारी, सेवाएं और सहायता एक ही मंच पर उपलब्ध कराई गई।
42 पार्किंग और 15 हजार सुरक्षाकर्मी
भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा के लिए 42 पार्किंग स्थलों की व्यवस्था की गई। मेला क्षेत्र में 15 हजार से अधिक पुलिसकर्मी तैनात रहे। सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए 500 से अधिक सीसीटीवी कैमरों के साथ-साथ ड्रोन के माध्यम से लगातार निगरानी की गई।
समग्र रूप से माघ मेला-2025 न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र रहा, बल्कि यह सुशासन, सामाजिक समरसता और प्रशासनिक दक्षता का ऐसा उदाहरण बना, जिसे आने वाले समय में बड़े आयोजनों के लिए एक आदर्श मॉडल के रूप में देखा जाएगा।

