The live ink desk. भारत पड़ोसी देश बांग्लादेश में लंबे राजनीतिक अंतराल के बाद सत्ता का नया अध्याय आरंभ हुआ। आम चुनावों में स्पष्ट बहुमत मिलने के बाद तारिक रहमान ने मंगलवार को प्रधानमंत्री पद की शपथ ग्रहण की। राजधानी ढाका स्थित संसद भवन के साउथ प्लाजा में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।
शपथ ग्रहण से पूर्व उनकी पार्टी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के संसदीय दल ने सर्वसम्मति से उन्हें नेता चुना था।
35 वर्षों बाद पुरुष प्रधानमंत्री
बांग्लादेश की राजनीति में यह परिवर्तन प्रतीकात्मक और ऐतिहासिक दोनों है। पिछले साढ़े तीन दशकों में देश की सत्ता मुख्यतः शेख हसीना और खालिदा जिया के नेतृत्व के इर्द-गिर्द रही। तारिक रहमान 35 वर्षों में पहले पुरुष प्रधानमंत्री बने हैं। वे पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के पुत्र हैं।
चुनावी परिदृश्य और बहुमत
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह बदलाव सत्ता के पारंपरिक ढांचे से अलग नई पीढ़ी के नेतृत्व की ओर संकेत करता है।
12 फरवरी को संपन्न आम चुनाव में बीएनपी ने निर्णायक बढ़त हासिल की। 300 सदस्यीय संसद में पार्टी ने 151 से अधिक सीटें जीतीं, जबकि गठबंधन के खाते में कुल 212 सीटें आईं। इस जनादेश के साथ तारिक रहमान आगामी पांच वर्षों के लिए प्रधानमंत्री पद की जिम्मेदारी संभालेंगे।
49 सदस्यीय मंत्रिपरिषद का गठन
नई सरकार में 25 कैबिनेट मंत्री और 24 राज्य मंत्री शामिल किए गए हैं। मंत्रिमंडल में अनुभवी नेताओं के साथ नए चेहरों को भी स्थान दिया गया है। संभावित प्रमुख नियुक्तियों में मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर को अहम मंत्रालय, अमीर खसरू महमूद चौधरी को वाणिज्य, सलाहुद्दीन अहमद को गृह, आईएमएफ के पूर्व अर्थशास्त्री डॉ. रजा किबरिया को वित्त, हुमायूं कबीर को विदेश तथा मोहम्मद असदुज्जमान को विधि मंत्रालय सौंपे जाने की चर्चा है।
अल्पसंख्यकों को भी प्रतिनिधित्व
सरकार ने विविधता का संदेश देते हुए हिंदू समुदाय के वरिष्ठ अधिवक्ता निताई रॉय चौधरी और बौद्ध चकमा समुदाय के दीपेन दीवान को मंत्रिपरिषद में स्थान दिया है। इससे समावेशी शासन की प्रतिबद्धता को रेखांकित करने का प्रयास माना जा रहा है।
भारत-बांग्लादेश संबंधों पर जोर
शपथ ग्रहण समारोह में भारत की ओर से ओम बिरला उपस्थित रहे। उन्होंने प्रधानमंत्री तारिक रहमान से मुलाकात कर शुभकामनाएं दीं और भारत आने का निमंत्रण भी सौंपा, साथ ही उन्होंने नरेंद्र मोदी का संदेश भी प्रेषित किया। बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने जनकेंद्रित सहयोग, क्षेत्रीय स्थिरता और द्विपक्षीय संबंधों को सुदृढ़ करने की प्रतिबद्धता दोहराई। बांग्लादेश की ओर से भी भारत के साथ सकारात्मक और व्यावहारिक संबंधों की इच्छा व्यक्त की गई।
कानून-व्यवस्था और संवैधानिक सुधार
प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने स्पष्ट किया है कि उनकी सरकार की शीर्ष प्राथमिकता कानून-व्यवस्था को मजबूत करना, संस्थागत सुधार लागू करना और व्यापक संवैधानिक सुधारों को आगे बढ़ाना होगी।
विश्लेषकों का मानना है कि नई सरकार के सामने आर्थिक स्थिरता, प्रशासनिक सुधार और क्षेत्रीय कूटनीतिक संतुलन जैसी चुनौतियां होंगी। हालांकि प्रचंड जनादेश के साथ सत्ता में आई यह सरकार बांग्लादेश की राजनीति में नई दिशा निर्धारित करने की क्षमता रखती है।


