नई दिल्ली. विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआईबी) ने 28 जनवरी 2026 को महाराष्ट्र के बारामती में हुए लीयरजेट 45 (वीटी-एसएसके) विमान हादसे की जांच को लेकर ताज़ा स्थिति रिपोर्ट जारी की है। जांच एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि पूरी प्रक्रिया ‘विमान (दुर्घटनाओं और घटनाओं की जांच) नियम, 2017’ तथा अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन के अनुलग्नक-13 के तहत निर्धारित वैश्विक मानकों और अनुशंसित प्रक्रियाओं के अनुरूप संचालित की जा रही है।
दो स्वतंत्र फ्लाइट रिकॉर्डर आग से प्रभावित
दुर्घटनाग्रस्त विमान में दो स्वतंत्र उड़ान रिकॉर्डर—डिजिटल फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (DFDR) और कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (CVR)—स्थापित थे। हादसे के दौरान विमान लंबे समय तक तीव्र ताप और आग की चपेट में रहा, जिससे दोनों उपकरणों को आंशिक क्षति पहुंची।
एएआईबी के अनुसार, एल3-कम्युनिकेशंस द्वारा निर्मित डिजिटल फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर को उसकी विशेष फ्लाइट रिकॉर्डर प्रयोगशाला में सफलतापूर्वक डाउनलोड कर लिया गया है। इससे उड़ान के तकनीकी मानकों, जैसे ऊंचाई, गति, इंजन प्रदर्शन और नियंत्रण इनपुट से संबंधित महत्वपूर्ण डेटा प्राप्त हुआ है, जिसका विश्लेषण जारी है।
कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर की गहन तकनीकी जांच
हनीवेल द्वारा निर्मित कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (CVR) की विस्तृत फॉरेंसिक जांच की जा रही है। चूंकि उपकरण को आग से क्षति हुई है, इसलिए डेटा रिकवरी की प्रक्रिया जटिल है। विशेष तकनीकी सहायता के लिए निर्माता देश के मान्यता प्राप्त प्रतिनिधि से औपचारिक संपर्क स्थापित किया गया है, ताकि अधिकतम संभव ऑडियो डेटा सुरक्षित रूप से पुनर्प्राप्त किया जा सके।
साक्ष्य-आधारित और निष्पक्ष जांच का आश्वासन
जांच एजेंसी ने दोहराया है कि वह सभी तकनीकी, परिचालन और मानवीय कारकों का समग्र मूल्यांकन कर रही है। मलबे के परीक्षण, रखरखाव अभिलेखों की समीक्षा, एयर ट्रैफिक कंट्रोल संचार, मौसम संबंधी आंकड़ों और पायलट प्रशिक्षण रिकॉर्ड का भी विश्लेषण किया जा रहा है।
एएआईबी ने स्पष्ट किया कि जांच का उद्देश्य दोष निर्धारण नहीं, बल्कि दुर्घटना के कारणों की वैज्ञानिक पहचान कर भविष्य में ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति रोकना है।
ब्यूरों ने अटकलों से बचने की अपील की
ब्यूरो ने सभी हितधारकों—मीडिया, विमानन विशेषज्ञों और आम नागरिकों—से अनुरोध किया है कि आधिकारिक निष्कर्ष आने तक किसी भी प्रकार की अटकलों से परहेज करें। एजेंसी ने आश्वासन दिया है कि जांच के उपयुक्त चरण पर तथ्यात्मक जानकारी सार्वजनिक की जाएगी।
बारामती हादसे की यह जांच तकनीकी जटिलता और अंतरराष्ट्रीय समन्वय के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अंतिम रिपोर्ट में संभावित कारणों के साथ सुरक्षा संबंधी सिफारिशें भी शामिल की जाएंगी, जो नागरिक उड्डयन क्षेत्र में सुरक्षा मानकों को और सुदृढ़ करने में सहायक होंगी।



