इवेंटताज़ा खबरभारत

बंगाल, असम और पुडुचेरी भगवामयः तमिलनाडु में विजय की ब्लाकबस्टर एंट्री

Assembly Elections 2026: पश्चिम बंगाल, असम, पुडुचेरी, तमिलनाडु और केरल के विधानसभा 2026 चुनाव परिणामों ने भाजपा को नए शीर्ष पर पहुंचा दिया है। चुनाव परिणमों ने 2018 का भी रिकार्ड ध्वस्त कर दिया है। अब देशभर के 12 राज्यों में भाजपा की सरकार है तो आठ राज्यों में भाजपा या सहयोगी दल सत्ता में है।

चार मई, 2026 की तारीख पश्चिम बंगाल की राजनीति में सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गई। यह, वही भाजपा है जो 2011 के बंगाल विस चुनाव में अपना खाता भी नहीं खोल पाई थी। 15 वर्ष पहले भाजपा ने पशिच्म बंगाल की 288 सीटों पर चुनाव लड़ा था।

भाजपा की इस प्रचंड जीत के साथ ही पश्चिम बंगाल में ‘ममता युग’ इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया। 2026 के चुनाव में भाजपा के खाते में जहां 207 सीटें आईं तो टीएमसी को 80 सीटें मिलीं। आजादी के बाद से 1977 तक एकछत्र राज करने वाली कांग्रेस दो सीटों पर सिमट गई। इसके अलावा आम जनता उन्नयन पार्टी ने दो, सीपीआई (एम) ने एक और आल इंडिया सेकुलर फ्रंट ने भी बंगाल चुनाव में एक सीट जीती है। एक सीट फालता पर 21 मई को फिर वोटिंग होगी।

भवानीपुर से ममता बनर्जी चुनाव हारीं

ममता बनर्जी अपनी भवानीपुर की सीट भी नहीं बचा पाईं। इस सीट से भारतीय जनता पार्टी के नेता सुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को हराया है। चुनाव आयोग की वेबसाइट के मुताबिक, भवानीपुर सीट पर सुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को 15,105 वोटों से हराया है। सुवेंदु नंदीग्राम सीट से भी चुनाव मैदान में थे, यहां से भी बीजेपी नेता ने जीत हासिल की है। सुवेंदु अधिकारी को 73463, ममता बनर्जी को 58350 वोट मिले। जीत के बाद सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि ममता बनर्जी को हराना बेहद जरूरी था। यह ममता बनर्जी की राजनीति से रिटायरमेंट है।

कांग्रेसी दिग्गज अधीर रंजन चौधरी हारे

बहरामपुर सीट से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी को पराजय का सामना करना पड़ा। भारतीय जनता पार्टी उम्मीदवार शुभ्रत मैत्रा ने उन्हें 17,548 मतों के अंतर से हराया। इस सीट पर बड़ा राजनीतिक उलटफेर देखने को मिला।

इस चुनाव में भी एम (M) फैक्टर हावी रहा। यहां की मुस्लिम बहुल सीटों पर टीएमसी को जीत मिली। उत्तर 24 परगना के देगंगा, हाड़ोवा और बशिरहाट क्षेत्र में भी पार्टी के मुस्लिम उम्मीदवारों ने जीत का परचम लहराया। दक्षिण 24 परगना में कैनिंग पूर्व और मगराहाट पश्चिम जैसी सीटों पर भी पार्टी ने यही सामाजिक समीकरण देखने को मिला। कोलकाता, मुर्शिदाबाद, और मालदा जैसे जिलों में पार्टी के ज्यादातर विजयी उम्मीदवार मुस्लिम समुदाय से आते हैं।

यह चुनाव नहीं, लूट है: ममता बनर्जी

चुनावों में मिली भारी पराजय के लिए ममता बनर्जी ने पारदर्शिता पर सवाल उठाए। कहा, यह चुनाव नहीं बल्कि लूट है। भवानीपुर काउंटिंग सेंटर से बाहर निकलते हुए ममता ने दावा किया कि भाजपा ने 100 से ज्यादा सीटें गलत तरीके से हासिल की हैं। उन्होंने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए। कहा कि उन्होंने राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज अग्रवाल से शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने केंद्रीय बलों और केंद्र सरकार पर भी आरोप लगाते हुए कहा कि पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष नहीं रही, हालांकि उन्होंने भरोसा जताया कि उनकी पार्टी वापसी करेगी।

जनता की शक्ति से खिला कमल: मोदी

चुनाव परिणामों के बाद पीएम नरेंद्र मोदी ने चुनाव प्रचार के दौरान दिए गए भाषणों को एक्स पर शेयर किया। कहा- पश्चिम बंगाल और असम में लगभग 93 प्रतिशत मतदान, और इसके साथ ही तमिलनाडु, पुडुचेरी तथा केरल में दर्ज किए गए मतदान के नए रिकॉर्ड, भारतीय लोकतंत्र की एक सुंदर तस्वीर पेश करते हैं।

नरेंद्र मोदी ने जनता और पार्टी कार्यकर्ताओं का आभार जताया। कहा, पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव ऐतिहासिक रूप से याद किए जाएंगे। यह जनता की शक्ति की जीत है और सुशासन की राजनीति की सफलता का प्रतीक है। उन्होंने पश्चिम बंगाल की जनता को नमन करते हुए कहा कि लोगों ने भाजपा को मजबूत जनादेश दिया है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पश्चिम बंगाल की जनता का आभार जताया है। सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा कि बंगाल की जनता को कोटि-कोटि नमन। उनके अनुसार, यह प्रचंड जनादेश भय, तुष्टीकरण और घुसपैठियों के समर्थकों के खिलाफ जनता का स्पष्ट संदेश है।

असम में ‘सुपर बहुमत’ के साथ लौटी भाजपा

असम विधानसभा चुनाव 2026 में भाजपा-नीत गठबंधन ने अभूतपूर्व प्रदर्शन करते हुए 126 में से 102 सीटों पर कब्जा जमाकर ऐतिहासिक जनादेश हासिल किया है। इस जीत के साथ गठबंधन ने लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी की है और राज्य की राजनीति में नया रिकॉर्ड कायम किया है।

चुनाव आयोग के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 82 सीटों पर जीत दर्ज की। उसके सहयोगी दलों में असम गण परिषद (AGP) और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (BPF) ने 10-10 सीटें जीतकर गठबंधन की बढ़त को निर्णायक बनाया। कुल मिलाकर गठबंधन का आंकड़ा 102 तक पहुंच गया।

विपक्ष की बात करें तो भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को 19 सीटों से संतोष करना पड़ा। ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) महज 2 सीटों पर सिमट गई। कांग्रेस गठबंधन में शामिल राइजर दल ने अपनी स्थिति सुधारते हुए 2 सीटें जीतीं, जबकि तृणमूल कांग्रेस (TMC) को 1 सीट पर सफलता मिली।

मत प्रतिशत के लिहाज से भी भाजपा आगे रही। भाजपा को लगभग 37.81% वोट मिले, जबकि कांग्रेस को 29.84% वोट प्राप्त हुए। यह जनादेश इसलिए भी खास है क्योंकि अतीत में कांग्रेस ने 2001, 2006 और 2011 में लगातार सरकार बनाई थी, लेकिन उसे कभी इतनी बड़ी जीत नहीं मिली। भाजपा ने इस बार सत्ता विरोधी रुझान को अपने पक्ष में मोड़ते हुए उसे सत्ता समर्थन लहर में तब्दील कर दिया।

हिमंत सरमा भारी अंतर से जीते, गोगोई हारे

असम विधानसभा चुनाव 2026 में मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा लगातार छठवीं बार बड़े अंतर से जालुकबारी विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीत गए हैं। डॉ. सरमा ने कांग्रेस की बिदिशा नेओग को 89434 मतों के अंतर से पराजित किया है। मुख्यमंत्री डॉ. सरमा को कुल 127151 मत मिले हैं जबकि बिदिशा नेओग को कुल 37717 मत प्राप्त हुए।

उल्लेखनीय है कि डॉ. सरमा पहली बार 2001 में विधानसभा चुनाव में तत्कालीन असम के गृह मंत्री भृगु फूकन को पराजित कर जीत हासिल की थी। तबसे लेकर आज तक इस क्षेत्र से डॉ. सरमा लगातार जीतते आ रहे हैं।

दूसरी तरफ असम प्रदेश कांग्रेस पार्टी (एपीसीसी) के अध्यक्ष एवं सांसद गौरव गोगोई ने आज घोषित असम विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद अपनी हार स्वीकार कर ली है। उन्होंने एक आधिकारिक बयान में कहा कि वे राज्य की जनता के जनादेश को विनम्रतापूर्वक स्वीकार करते हैं। साथ ही उन सभी मतदाताओं का आभार व्यक्त किया, जिन्होंने कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन के प्रत्याशियों पर अपना विश्वास जताया।

पुडुचेरीः NDA की सत्ता बरकरार, 30 में 18 सीटों पर जीत

पुडुचेरी विधानसभा चुनाव 2026 में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने स्पष्ट बहुमत हासिल करते हुए सत्ता बरकरार रखी है। 30 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा-नीत गठबंधन को 18 सीटें, जबकि कांग्रेस गठबंधन को 6 सीटें मिलीं। इसके अलावा अन्य दलों और निर्दलियों के खाते में 6 सीटें गई हैं।

चुनाव परिणामों में कई सीटों पर कड़ा मुकाबला देखने को मिला, वहीं कुछ सीटों पर निर्णायक जीत भी दर्ज हुई। सबसे चर्चित मुकाबला थट्टांचावडी (सीट संख्या-9) में रहा, जहां मुख्यमंत्री एन. रंगास्वामी ने शानदार जीत दर्ज की। ऑल इंडिया एन.आर. कांग्रेस (AINRC) के रंगास्वामी को 10,024 वोट मिले। उनके प्रतिद्वंद्वी ई. विनायगम (नेयम मक्कल कझगम) को 5,583 वोट मिले। यहां हार-जीत का अंतर 4,441 वोट रहा।

रंगास्वामी का यह राजनीतिक दबदबा इसलिए भी अहम है क्योंकि वे पहले भी चार बार (2001-06, 2006-08, 2011-16 और 2021 से अब तक) पुडुचेरी के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। इसके अलावा एम्बालम और मन्नादीपेट सीटों पर भी बड़े अंतर से जीत दर्ज की गई, जिसने NDA की बढ़त को और मजबूत किया।

इस चुनाव में तमिलागा वेत्री कषगम (TVK) ने भी उल्लेखनीय प्रदर्शन करते हुए 2 सीटों पर जीत हासिल की। मनवेली सीट से बी. रामू और तिरुभुवनई सीट से साई जे. सरवनन कुमार ने चुनावी मैदान मारा।

TVK 107 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी, द्रविड़ का वर्चस्व टूटा

करीब छह दशकों से द्रमुक–अन्नाद्रमुक के बीच सिमटी तमिलनाडु की राजनीति में इस बार (विधानसभा चुनाव 2026) बड़ा उलटफेर हुआ है। अभिनेता से नेता बने जोसेफ विजय की पार्टी तमिलागा वेत्री कषगम (TVK) ने पहली ही चुनावी पारी में 107 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनते हुए सियासी परिदृश्य बदल दिया। स्पष्ट बहुमत से कुछ कदम दूर रहते हुए भी TVK का प्रदर्शन ऐतिहासिक माना जा रहा है।

चुनाव आयोग के नतीजों के अनुसार, द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) और उसके सहयोगियों को बड़ा झटका लगा है और उनका आंकड़ा घटकर 66 सीटों पर सिमट गया। मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने हार स्वीकार कर ली। वहीं अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (AIADMK) के नेतृत्व वाला गठबंधन 53 सीटों पर सिमटकर तीसरे नंबर पर खिसक गया। अन्य दल कोई खास प्रभाव नहीं छोड़ सके और शून्य पर रहे।

लगभग 59–60 वर्षों से चली आ रही द्रविड़ दलों की अदला-बदली की परंपरा इस चुनाव में टूटती दिखी। पहली बार चुनाव मैदान में उतरी TVK ने मतदाताओं के बीच एक नए विकल्प के रूप में उभरते हुए व्यापक समर्थन हासिल किया।

केरल में वामपंथी युग का अवसान, यूडीएफ की वापसी

इस चुनाव में केरल की राजनीति में ऐतिहासिक बदलाव दर्ज हुआ है। जिस राज्य में 1957 में ईएमएस नंबूदिरीपाद के नेतृत्व में पहली वामपंथी सरकार बनी थी, वहीं अब वामपंथी सत्ता का प्रभावी अंत होता दिख रहा है। कभी गैर-कांग्रेसवाद की धुरी रहा केरल अब पूरी तरह नई राजनीतिक दिशा में मुड़ गया है।

वाम दलों ने केरल से शुरुआत कर देश के कई हिस्सों में अपनी पकड़ मजबूत की थी। पश्चिम बंगाल में तो 1977 से लगातार 34 वर्षों तक मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी का शासन रहा। लेकिन मौजूदा जनादेश ने इस लंबे राजनीतिक प्रभाव को निर्णायक झटका दिया है।

यूडीएफ की ऐतिहासिक जीत

कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) ने 102 सीटें जीतकर दो-तिहाई से अधिक बहुमत हासिल किया है। यह जीत 10 वर्षों बाद सत्ता में उसकी मजबूत वापसी का संकेत है।

सीटों के ब्योरे पर नजर डालें तो कांग्रेस को 63 सीटें मिलीं। उसके सहयोगी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) ने 22 सीटें जीतीं, जबकि केरल कांग्रेस को 7 और रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी को 3 सीटें मिलीं। इसके अलावा केरल कांग्रेस (जैकब), रिवोल्यूशनरी मार्क्सिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया और कम्युनिस्ट मार्क्सिस्ट पार्टी (केरल स्टेट कमेटी) को एक-एक सीट पर जीत मिली।

केरलम में भाजपा ने भी खोला खाता

भारतीय जनता पार्टी ने इस चुनाव में पहली बार केरल विधानसभा में प्रवेश करते हुए 3 सीटें जीतकर राजनीतिक उपस्थिति दर्ज कराई है।

भाजपा की ओर से राजीव चंद्रशेखर ने 4900 से अधिक मतों के अंतर से जीत दर्ज कर उल्लेखनीय प्रदर्शन किया। कोल्लम जिले की चथन्नूर सीट से बी.बी. गोपकुमार 4,398 वोटों से विजयी रहे। वहीं वी. मुरलीधरन ने कझाक्कूट्टम सीट पर महज 428 वोटों के अंतर से रोमांचक जीत हासिल की।

दूसरी तरफ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मुख्यमंत्री पद के दावेदार वी.डी. सतीसन ने परवूर सीट से जीत हासिल की। वहीं रमेश चेन्निथला हरिपाड से विजयी रहे, जिससे नेतृत्व की दौड़ और दिलचस्प हो गई है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button