विवेक विहार अग्निकांड: चार मंजिला इमारत ‘लाक्षागृह’ बनी, नौ की मौत

नई दिल्ली. पूर्वी दिल्ली के विवेक विहार (Vivek Vihar) फेज-1 में रविवार तड़के लगी भीषण आग ने एक रिहायशी इमारत को मौत के जाल में बदल दिया। चार मंजिला मकान (बी-13) में आग लगने की सूचना 3:48 बजे पीसीआर कॉल के जरिए मिली। कुछ ही मिनटों में दूसरी, तीसरी और चौथी मंजिल लपटों से घिर गईं। दमकल की 12 गाड़ियों और पुलिस के संयुक्त ऑपरेशन के बावजूद 9 लोगों की जान चली गई, जबकि 10–15 लोगों को समय रहते बाहर निकाल लिया गया।
एक परिवार के पांच जिंदा जले, तीन मंजिलों से मिले शव
पुलिस के अनुसार, दूसरी मंजिल के पिछले फ्लैट से एक ही परिवार के पांच शव बरामद हुए—अरविंद जैन (60), अनीता जैन (58), निशांत जैन (35), आंचल जैन (33) और डेढ़ वर्षीय आकाश जैन। पहली मंजिल से शिखा जैन (45) का शव मिला, जबकि तीसरी मंजिल से नितिन जैन (50), शैली जैन (48) और सम्यक जैन (25) मृत पाए गए। हादसे में झुलसे नवीन जैन (48) का इलाज जारी है।
आधा दर्जन फ्लैट में फैली आग, दर्जनभर गाड़ियां लगीं
दमकल विभाग के प्रवक्ता एके मलिक के मुताबिक, आग इमारत के छह फ्लैटों में रखे घरेलू सामान के जरिए तेजी से फैली। ऊपरी मंजिलों पर ‘फ्लैशओवर’ जैसी स्थिति बनने से धुआं और गर्मी कुछ ही मिनटों में घातक स्तर तक पहुंच गई। राहत-बचाव के दौरान विभिन्न मंजिलों से नौ झुलसे शव निकाले गए।
‘सेफ्टी फेल्योर’—निकास और लोडिंग पैटर्न पर सवाल
प्रारंभिक जांच शॉर्ट सर्किट या तकनीकी कारण की ओर इशारा करती है, लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक असली जोखिम ‘इवैक्युएशन फेल्योर’ और ‘फ्यूल लोड’ (घरेलू सामान की मात्रा/प्रकार) से बढ़ा। बहुमंजिला रिहायशी ढांचों में यदि स्पष्ट निकास मार्ग, कामकाजी फायर अलार्म/स्प्रिंकलर और धुएं की निकासी की व्यवस्था नहीं हो, तो आग तेजी से ‘ट्रैप’ में बदल जाती है। पुलिस अब भवन की फायर सेफ्टी अनुपालना, एग्जिट रूट्स और निर्माण मानकों की जांच कर रही है।
यह घटना केवल एक हादसा नहीं, शहरी आवासीय सुरक्षा की बड़ी चेतावनी है—जहां मिनटों में फैलती आग और धुएं ने पूरे परिवारों को खत्म कर दिया। जांच की दिशा अब यह तय करेगी कि यह महज तकनीकी खराबी थी या सुरक्षा मानकों की गंभीर चूक।

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