
The live ink desk. राज्य विधानसभा के बजट सत्र में पेश आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 ने संकेत दिया है कि मध्य प्रदेश की अर्थव्यवस्था ने व्यापक और संरचनात्मक विस्तार दर्ज किया है। उप मुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने सदन में बताया कि वर्ष 2025-26 के अग्रिम अनुमान के अनुसार राज्य का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) प्रचलित मूल्यों पर 16,69,750 करोड़ रुपये आंका गया है, जो पिछले वर्ष के 15,02,428 करोड़ रुपये की तुलना में 11.14 प्रतिशत अधिक है। स्थिर (2011-12) मूल्यों पर 7,81,911 करोड़ रुपये का अनुमान 8.04 प्रतिशत की वास्तविक वृद्धि को दर्शाता है।
वित्त मंत्री ने कहा कि नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य समावेशी और परिणामोन्मुख विकास पथ पर अग्रसर है। आर्थिक सर्वेक्षण के संकेत बताते हैं कि कृषि-आधारित आधार को सुदृढ़ रखते हुए उद्योग और सेवाओं में विस्तार के साथ मध्य प्रदेश बहु-आयामी विकास मॉडल की ओर बढ़ रहा है।
आय स्तर में उल्लेखनीय सुधार
राज्य की प्रति व्यक्ति आय में भी महत्वपूर्ण वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2011-12 में 38,497 रुपये रही प्रति व्यक्ति आय बढ़कर 2025-26 में 1,69,050 रुपये हो गई है। स्थिर मूल्यों पर यह 76,971 रुपये तक पहुंची है। सरकार का दावा है कि यह वृद्धि केवल मूल्य प्रभाव नहीं, बल्कि उत्पादन और आर्थिक गतिविधियों के वास्तविक विस्तार का परिणाम है।
क्षेत्रीय संरचना: संतुलित विकास
प्रचलित मूल्यों पर सकल राज्य मूल्य वर्धन (जीएसवीए) में प्राथमिक क्षेत्र की हिस्सेदारी 43.09 प्रतिशत, द्वितीयक क्षेत्र की 19.79 प्रतिशत और तृतीयक क्षेत्र की 37.12 प्रतिशत रही। स्थिर मूल्यों पर यह संरचना क्रमशः 33.54, 26.18 और 40.28 प्रतिशत रही—जो कृषि आधार को बनाए रखते हुए उद्योग और सेवाओं के विस्तार की ओर इशारा करती है।
प्राथमिक क्षेत्र
2025-26 में प्राथमिक क्षेत्र का जीएसवीए 6,79,817 करोड़ रुपये रहा, जो 7.31 प्रतिशत की वृद्धि है। फसलें 30.17 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ अग्रणी रहीं। 2024-25 में कुल फसल उत्पादन 7.66 प्रतिशत और खाद्यान्न उत्पादन 14.68 प्रतिशत बढ़ा। उद्यानिकी क्षेत्र 28.39 लाख हेक्टेयर रहा, दुग्ध उत्पादन 225.95 लाख टन तक पहुंचा। 72,975 किमी ग्रामीण सड़कों और 40.82 लाख ग्रामीण आवासों के निर्माण से ग्रामीण अवसंरचना सुदृढ़ हुई।
द्वितीयक क्षेत्र
द्वितीयक क्षेत्र का जीएसवीए 3,12,350 करोड़ रुपये रहा, जिसमें 9.93 प्रतिशत की वृद्धि हुई। निर्माण, विनिर्माण और उपयोगिताओं का योगदान प्रमुख रहा। 1,028 औद्योगिक इकाइयों को 6,125 एकड़ भूमि आवंटन से 1.17 लाख करोड़ रुपये के प्रस्तावित निवेश और लगभग 1.7 लाख रोजगार की संभावना बनी। एमएसएमई सहायता 2,162 करोड़ रुपये रही; 1,723 स्टार्टअप और 103 इनक्यूबेशन केंद्र सक्रिय हैं। सीएसआर व्यय 600.47 करोड़ रुपये दर्ज हुआ।
तृतीयक क्षेत्र
तृतीयक क्षेत्र ने 15.80 प्रतिशत की सर्वाधिक वृद्धि दर के साथ 5,85,588 करोड़ रुपये का जीएसवीए दर्ज किया। व्यापार, होटल-रेस्टोरेंट, वित्तीय सेवाएं, रियल एस्टेट और लोक प्रशासन प्रमुख चालक रहे। पर्यटन में 13.18 करोड़ आगंतुक दर्ज किए गए।
वित्तीय अनुशासन और राजकोषीय संकेतक
वर्ष 2025-26 में 618 करोड़ रुपये का राजस्व अधिशेष अनुमानित है। राजस्व में 13.57 प्रतिशत वृद्धि और ऋण-जीएसडीपी अनुपात 31.3 प्रतिशत रहने का अनुमान वित्तीय स्थिरता की ओर संकेत करता है।
नगरीय, स्वास्थ्य और शिक्षा मोर्चे पर प्रगति
- अमृत 2.0 के तहत 4,065 करोड़ रुपये का आवंटन; 1,134 परियोजनाएं स्वीकृत।
- प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) में 8.75 लाख आवास पूर्ण।
- स्वच्छ सर्वेक्षण 2024 में 8 राष्ट्रीय पुरस्कार।
- स्वास्थ्य व्यय 34,112 करोड़ रुपये (जीएसडीपी का 3%)।
- नवंबर 2025 तक 4.42 करोड़ आयुष्मान कार्ड जारी; मातृ मृत्यु दर 379 (2001-03) से घटकर 142 (2021-23) प्रति लाख जीवित जन्म।
- शिक्षा पर कुल बजट का 10.37 प्रतिशत आवंटित (पिछले वर्ष से 9% अधिक)। कक्षा 1-5 में ड्रॉपआउट शून्य, कक्षा 6-8 में 6.3%। 45,668 विद्यार्थियों को 500 करोड़ रुपये की सहायता। तकनीकी संस्थान 1,625 से बढ़कर 2,070।



