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ई-कॉमर्स प्लेटफार्म Myntra को झटका, आयोग ने लगाया 55000 रुपये जुर्माना

भदोही (संजय सिंह). ऑनलाइन खरीदारी में लापरवाही का मामला सामने आने पर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, भदोही ने ई-कॉमर्स कंपनी Myntra के खिलाफ कड़ा आदेश जारी किया है। आयोग ने कंपनी को सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार का दोषी मानते हुए उपभोक्ता को धनवापसी, ब्याज और क्षतिपूर्ति देने के निर्देश दिए हैं। खरीदी गई वस्तु की कीमत के अलावा कंपनी को कुल 55000 रुपये बतौर जुर्माना चुकाना होगा।

क्या है पूरा मामला?

जंगीगंज बाजार, जीटी रोड निवासी अरुण कुमार मोदनवाल ने 21 नवंबर 2023 को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से ‘कार्ल लैगरफेल्ड मॉक कॉलर पफर जैकेट’ (लार्ज साइज) 26,520 रुपये में ऑर्डर की थी। आरोप है कि पार्सल खोलने पर जैकेट की जगह कम कीमत का बच्चों का हाफ पैंट मिला।

उपभोक्ता ने तुरंत रिटर्न और शिकायत दर्ज कराई, साथ ही विधिक नोटिस भी भेजा, लेकिन समाधान नहीं हुआ। इसके बाद उन्होंने जिला उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया।

कंपनी का तर्क और आयोग की टिप्पणी

सुनवाई के दौरान कंपनी की ओर से कहा गया कि वह केवल एक ऑनलाइन मार्केटिंग प्लेटफॉर्म है और उत्पाद की जिम्मेदारी विक्रेता की है। हालांकि आयोग ने इस दलील को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि प्लेटफॉर्म अपने माध्यम से की गई बिक्री और डिलीवरी की जवाबदेही से अलग नहीं हो सकता। उपभोक्ता के साथ हुए व्यवहार के लिए प्लेटफॉर्म भी उत्तरदायी है।

आयोग का आदेश

अध्यक्ष संजय कुमार डे और सदस्य दीप्ति श्रीवास्तव व विजय बहादुर सिंह की पीठ ने कंपनी को निर्देश दिया कि— 26,520 रुपये की मूल राशि 21 नवंबर 2023 से आदेश की तिथि तक 6 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज सहित लौटाई जाए। मानसिक-आर्थिक क्षति व सेवा में कमी के लिए 50000 रुपये क्षतिपूर्ति दी जाए। वाद व्यय के रूप में 5,000 रुपये का भुगतान किया जाए।

उपभोक्ताओं के लिए संकेत

आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि दो माह के भीतर आदेश का पालन नहीं किया गया तो संपूर्ण देय राशि पर 12 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज लागू होगा। यह निर्णय ऑनलाइन शॉपिंग में उपभोक्ता अधिकारों की मजबूती का संकेत देता है। आयोग ने साफ किया कि बड़े ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म भी जवाबदेही से मुक्त नहीं हैं। विधि विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला भविष्य में ऐसे मामलों में मिसाल बनेगा और कंपनियों को अपनी डिलीवरी प्रणाली व शिकायत निवारण तंत्र को और अधिक पारदर्शी एवं प्रभावी बनाना होगा।

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