आंकड़ों से खेल रही योगी सरकार, रोजगार सृजन पर स्पष्ट नीति नहीः आराधना मिश्रा

कांग्रेस विधान मंडल दल की नेता व रामपुर खास से विधायक ने निजीकरण को बढ़ावा देने का लगाया आरोप
लखनऊ/प्रतापगढ़ (हरिश्चंद्र यादव). उत्तर प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के अंतिम दिन विपक्ष ने राज्य सरकार की वित्तीय नीतियों और रोजगार सृजन के मुद्दे पर तीखी आपत्ति दर्ज कराई। बजट 2026–27 पर चर्चा के दौरान कांग्रेस विधानमंडल दल की नेता आराधना मिश्रा ( Aradhana Mishra) ने सरकार पर विकास के नाम पर निजीकरण को बढ़ावा देने और युवाओं को स्थायी रोजगार उपलब्ध कराने में विफल रहने का आरोप लगाया।
सदन में अपने वक्तव्य में उन्होंने कहा कि राज्य का बजट आकार लगातार बढ़ाया जा रहा है, लेकिन वास्तविक व्यय और जमीनी प्रभाव को लेकर पारदर्शिता आवश्यक है। उनके अनुसार, यदि बजट आवंटन का समुचित उपयोग नहीं हो रहा है तो केवल आंकड़ों में वृद्धि से आम जनता को प्रत्यक्ष लाभ नहीं मिलेगा।
बजट आकार और व्यय पर सवाल
राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026–27 के लिए 9 लाख 13 हजार करोड़ रुपये का बजट प्रस्तुत किया है। इससे पूर्व 2025–26 में 8 लाख 87 हजार 736 करोड़ रुपये का मूल बजट पेश किया गया था। विपक्ष का तर्क है कि बजट के आकार में वृद्धि के समानुपाती रूप से व्यय और परिणाम दिखाई देने चाहिए।
रोजगार और आउटसोर्सिंग का मुद्दा
कांग्रेस ने विशेष रूप से युवाओं की रोजगार स्थिति और आउटसोर्सिंग आधारित नियुक्तियों पर चिंता जताई। पार्टी ने सदन में मांग की कि राज्य सरकार स्थायी नौकरियों और सम्मानजनक वेतन संरचना के लिए स्पष्ट एवं दीर्घकालिक नीति घोषित करे। वक्तव्य में यह भी कहा गया कि अस्थायी एवं संविदा आधारित नियुक्तियों की बढ़ती प्रवृत्ति युवाओं में असुरक्षा की भावना पैदा कर रही है।
डबल इंजन के निजीकरण पर आपत्ति
विपक्ष का आरोप है कि “डबल इंजन” की सरकार विकास परियोजनाओं और सार्वजनिक सेवाओं में निजी भागीदारी को प्राथमिकता दे रही है। कांग्रेस ने इसे राज्य की सामाजिक-आर्थिक संरचना के लिए दीर्घकालिक चुनौती बताया और कहा कि इससे किसानों, युवाओं, दलितों, पिछड़े वर्गों तथा निम्न आय वर्ग पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
रोजगार, बजट के लिए नीति की मांग
सदन में कांग्रेस ने रोजगार सृजन, बजट व्यय की निगरानी और सामाजिक क्षेत्र की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए स्पष्ट रोडमैप प्रस्तुत करने की मांग की। सरकार की ओर से बजट को विकासोन्मुख और व्यापक बताया गया है, जबकि विपक्ष ने इसके क्रियान्वयन और प्राथमिकताओं पर सवाल उठाए हैं। बजट सत्र के समापन दिवस पर इस मुद्दे को लेकर सदन में राजनीतिक बहस तेज रही।


