
The live ink desk. पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच ईरान के तेल और ईंधन ठिकानों पर इजराइल के हमलों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन घटनाओं का असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और तेल बाजार पर पड़ सकता है।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इन हमलों को लेकर अमेरिकी प्रशासन के भीतर भी हलचल देखी जा रही है। बताया जा रहा है कि कुछ अमेरिकी अधिकारियों को हमलों की योजना की जानकारी थी, लेकिन उनके दायरे और नुकसान की तीव्रता ने कई अधिकारियों को चौंका दिया।
सूत्रों के मुताबिक शनिवार रात इजराइली हमलों में ईरान के कई ईंधन डिपो और तेल से जुड़े प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया। हमलों के बाद प्रभावित इलाकों से आसमान में उठते घने धुएं के गुबार देखे गए, जिससे ऊर्जा उत्पादन और आपूर्ति पर संभावित असर को लेकर चिंता बढ़ गई है।
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेल की बढ़ती कीमतों को लेकर अधिक चिंता व्यक्त नहीं की। उनका कहना है कि क्षेत्रीय संघर्ष समाप्त होने के बाद तेल की कीमतों में गिरावट आ सकती है। हालांकि प्रशासन के कुछ सलाहकारों का मानना है कि तेल की कीमतों में तेजी राजनीतिक रूप से संवेदनशील मुद्दा बन सकती है।
वहीं सैयद अब्बास अराघची, विदेश मंत्री ईरान, ने दावा किया है कि संघर्ष शुरू होने के नौ दिनों के भीतर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगभग दोगुनी हो गई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका ईरान के तेल और परमाणु ठिकानों को निशाना बनाने की योजना बना रहा है।
अराघची ने कहा कि ईरान किसी भी संभावित कार्रवाई का जवाब देने के लिए तैयार है। विश्लेषकों का मानना है कि इजराइल और ईरान के बीच बढ़ता तनाव आने वाले दिनों में वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति को प्रभावित कर सकता है।

