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नेपाल चुनाव में राजतंत्र को झटका, RPP को सिर्फ एक सीट, 60 युवा पहुंचे संसद

The live ink desk. नेपाल के संसदीय चुनाव में राजतंत्र की बहाली की मांग उठाने वाली राजनीतिक शक्तियों को बड़ा झटका लगा है। चुनाव परिणामों में Rastriya Prajatantra Party (आरपीपी) का प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा और पार्टी का केवल एक उम्मीदवार ही जीत दर्ज कर सका।

प्रतिनिधि सभा चुनाव में युवाओं की भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिली है। सोमवार तक घोषित 160 निर्वाचन क्षेत्रों के परिणामों के अनुसार 40 वर्ष से कम आयु के 60 उम्मीदवार संसद के लिए निर्वाचित हुए हैं।

वरिष्ठ नेताओं को हार का सामना

चुनाव में आरपीपी के कई प्रमुख नेता पराजित हुए, जिनमें पार्टी अध्यक्ष Rajendra Lingden भी शामिल हैं। इसके अलावा पूर्व उपप्रधानमंत्री Kamal Thapa, पूर्व पुलिस प्रमुख और पूर्व मंत्री Dhruv Bahadur Pradhan, तथा वरिष्ठ पत्रकार-राजनेता Rabindra Mishra भी चुनाव हार गए। हालांकि, पार्टी के युवा नेता Gyanendra Shahi जुमला संसदीय क्षेत्र से अपनी सीट बचाने में सफल रहे।

रवींद्र ने राजनीति से लिया संन्यास

परिणाम घोषित होने के बाद काठमांडू-1 सीट से पराजित होने वाले Rabindra Mishra ने सक्रिय राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा कर दी। उन्होंने कहा कि राजतंत्र समर्थक विचारों के प्रति जनसमर्थन होने के बावजूद पार्टी नेतृत्व की कमजोरियों और आंतरिक मतभेदों के कारण यह समर्थन वोट में नहीं बदल सका।

गणतंत्र के पक्ष में जनमत का संकेत

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह परिणाम दर्शाता है कि नेपाल की बड़ी आबादी दोबारा राजतंत्र की व्यवस्था में लौटने के पक्ष में नहीं है। इसे 2008 में स्थापित गणतांत्रिक व्यवस्था की स्वीकार्यता के संकेत के रूप में देखा जा रहा है, जब Nepal को औपचारिक रूप से संघीय लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित किया गया था और राजशाही समाप्त कर दी गई थी।

पूर्व राजा की वापसी की संभावना कमजोर

विश्लेषकों के अनुसार इन परिणामों के बाद पूर्व राजा Gyanendra Shah की सत्ता में वापसी की संभावनाएं और कमजोर हो गई हैं। हालांकि कुछ संगठनों और छोटे समूहों द्वारा समय-समय पर राजतंत्र की बहाली की मांग उठती रही है, लेकिन चुनावी राजनीति में इसका प्रभाव सीमित दिखाई दे रहा है।

कमजोर प्रदर्शन के पीछे प्रमुख कारण

विश्लेषकों के मुताबिक आरपीपी के खराब प्रदर्शन के पीछे कई कारण रहे। जैसे- पिछले डेढ़ दशक में गणतांत्रिक व्यवस्था की स्वीकार्यता बढ़ना, नए राजनीतिक चेहरों और वैकल्पिक राजनीति का उभार, रोजगार, भ्रष्टाचार और विकास जैसे स्थानीय मुद्दों का चुनाव में अधिक प्रभाव और राजशाही के अंतिम वर्षों से जुड़ी राजनीतिक अस्थिरता की स्मृतियां आदि हैं।

पिछले चुनाव की तुलना में बड़ा बदलाव

पिछले संसदीय चुनाव में युवाओं की भागीदारी काफी सीमित थी। वर्ष 2022 में 165 निर्वाचन क्षेत्रों में से केवल 10 उम्मीदवार ही 40 वर्ष से कम आयु के होकर संसद पहुंच पाए थे।

उस चुनाव में 70 वर्ष से अधिक आयु के 14 सांसद निर्वाचित हुए थे, जबकि 40 से 70 वर्ष आयु वर्ग के सांसदों की संख्या सबसे अधिक, 138 रही थी।

नई संसद में बढ़ा युवा प्रतिनिधित्व

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार House of Representatives of Nepal के लिए हुए चुनाव में अब तक घोषित सीटों के आधार पर युवा सांसदों की संख्या उल्लेखनीय रूप से बढ़ी है। अभी 110 समानुपातिक प्रतिनिधित्व वाली सीटों के परिणाम आने बाकी हैं, जिनमें भी कई युवा नेताओं के संसद में पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। नेपाल की कुल आबादी में 16 से 40 वर्ष आयु वर्ग के लोगों की हिस्सेदारी लगभग 40.35 प्रतिशत है।

एक नजर में चुनाव परिणाम

  • नेपाल के संसदीय चुनाव में राजतंत्र समर्थक दलों को करारा झटका
  • आरपीपी का केवल एक उम्मीदवार ही जीत सका
  • पार्टी अध्यक्ष राजेन्द्र लिंगदेन सहित कई वरिष्ठ नेता पराजित
  • रवींद्र मिश्रा ने चुनाव हारने के बाद सक्रिय राजनीति से संन्यास लिया
  • 2008 के बाद स्थापित गणतांत्रिक व्यवस्था के प्रति जनसमर्थन का संकेत
  • पूर्व राजा ज्ञानेन्द्र शाह की सत्ता में वापसी की संभावना और कमजोर
  • नेपाल के प्रतिनिधि सभा चुनाव में युवा नेताओं की मजबूत मौजूदगी
  • 160 घोषित सीटों में से 40 वर्ष से कम आयु के 60 सांसद निर्वाचित
  • अभी 110 समानुपातिक सीटों के परिणाम आने बाकी
  • नेपाल की आबादी में 16–40 आयु वर्ग की हिस्सेदारी करीब 40.35%
  • 2022 के चुनाव में 40 वर्ष से कम आयु के केवल 10 सांसद चुने गए थे
  • नए चुनाव परिणामों को राजनीति में पीढ़ीगत बदलाव का संकेत माना जा रहा है

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