अधीक्षक को नोटिस, DBT फीडिंग करने वाले एकाउंटेंट की सेवा समाप्त

भदोही में हेल्थ सिस्टम ‘अकाउंटेबिलिटी मोड’ में, तीन माह का HPV मिशन टारगेट
भदोही (संजय सिंह). जनस्वास्थ्य सेवाओं में ढिलाई पर सख्त रुख अपनाते हुए जिलाधिकारी शैलेष कुमार ने जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में स्पष्ट कर दिया कि अब हर इकाई की जवाबदेही तय होगी—गैरहाजिरी, धीमी प्रगति और डेटा-लैग पर त्वरित कार्रवाई। कलेक्ट्रेट सभागार में हुई समीक्षा में कार्यक्रमों की प्रगति, वित्तीय अनुमोदन और फील्ड-लेवल डिलीवरी को “समयबद्ध और पारदर्शी” ढांचे में लाने के निर्देश दिए गए।
सबसे पहले ई-प्रिस्क्रिप्शन सिस्टम में अपेक्षित प्रगति न मिलने पर एमसीएस ज्ञानपुर के अधीक्षक को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश हुए। समानांतर रूप से, अवैध चिकित्सालयों के खिलाफ अभियान तेज करने के लिए एमओआईसी को निरीक्षण के आदेश दिए गए, जबकि जनऔषधि केंद्रों की गुणवत्ता/उपलब्धता की जांच भी अनिवार्य की गई।
कैंसर-रोकथाम के मोर्चे पर जनपद को स्पष्ट लक्ष्य मिला—HPV वैक्सीनेशन ड्राइव (01 अप्रैल–30 जून 2026) में 14 वर्ष की किशोरियों का 100% टीकाकरण। डीआईओ ने बताया कि यह टीका ह्यूमन पैपिलोमा वायरस से बचाव करता है, जो सर्वाइकल कैंसर का प्रमुख कारण है। अभियान के बाद यह वैक्सीन हर वीएचएनडी सत्र पर नियमित रूप से उपलब्ध कराई जाएगी। डीएम ने सभी अधीक्षकों को निर्देश दिया कि ड्यू-लिस्ट तैयार कर शत-प्रतिशत कवरेज सुनिश्चित करें।
जवाबदेही के ठोस संकेत देते हुए टीबी कार्यक्रम में निक्षय पोर्टल पर DBT फीडिंग में लगातार कमी और नोटिस के बावजूद सुधार न करने पर एकाउंटेंट के खिलाफ सेवा समाप्ति की कार्रवाई के निर्देश दिए गए। डीएम ने कहा, “स्वास्थ्य विभाग सीधे आमजन से जुड़ा है—समय पर उपस्थिति, समुचित उपचार और डेटा की शुद्धता अनिवार्य है; लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी।”
सिस्टम सुधार के लिए UP Health Dashboard के सभी सूचकांकों की समीक्षा कर अगली बैठक में कंपोजिट रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया। सभी एमओआईसी को निर्देश मिला कि साप्ताहिक समीक्षा बैठक (आशा/एएनएम के साथ) कर फील्ड आउटपुट बढ़ाएं और कार्यवृत्ति अगले दिन तक प्रस्तुत करें। क्वालिटी एश्योरेंस के तहत आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में लैब-स्लैब/बेसिंग, साफ-सफाई और टीम-बेस्ड इंटेंसिव पर फोकस बढ़ाने के निर्देश दिए गए; पीएचसी/सीएचसी पर ड्यूटी रूम व हाइजीन अनिवार्य किया गया।
मातृ-शिशु स्वास्थ्य में संस्थागत प्रसव बढ़ाने के लिए आशा-एएनएम को सक्रिय करने और प्रसूता को कम से कम 48 घंटे अस्पताल में रुकने के लिए प्रेरित करने पर जोर दिया गया। सभी कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर्स की उपस्थिति को बायोमेट्रिक/अटेंडेंस सिस्टम से नियमित करने और आयुष चिकित्सालयों की 15 दिन में मजिस्ट्रेटीय जांच कर रिपोर्ट देने के निर्देश भी जारी हुए।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी बाल गोविंद शुक्ला, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संतोष कुमार सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।


