
The live ink desk. बांग्लादेश के 13वें संसदीय चुनाव में निर्णायक जनादेश सामने आया है। करीब दो दशक बाद बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) गठबंधन ने प्रचंड बढ़त बनाते हुए संसद में स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया। नतीजों के साथ ही बीएनपी नेता तारिक रहमान के प्रधानमंत्री बनने की संभावना प्रबल हो गई है।
अनाधिकारिक परिणामों के अनुसार, 299 सदस्यीय संसद की अधिकांश सीटों पर फैसला हो चुका है। बीएनपी और उसके सहयोगियों ने दो सौ से अधिक सीटों पर जीत दर्ज कर सत्ता की दावेदारी मजबूत की है, जबकि जमात-ए-इस्लामी गठबंधन अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर सका। छात्र आंदोलन से उभरी नई ताकतों को भी मतदाताओं ने समर्थन नहीं दिया। पूर्व सत्ताधारी अवामी लीग इस चुनावी प्रक्रिया से बाहर रही।
भौगोलिक दृष्टि से भी बीएनपी का प्रदर्शन व्यापक रहा। पार्टी ने उन इलाकों में भी बढ़त बनाई, जिन्हें परंपरागत रूप से विरोधी खेमे का गढ़ माना जाता था। इससे संकेत मिला कि जनादेश केवल सत्ता-विरोध तक सीमित नहीं, बल्कि नेतृत्व परिवर्तन की स्पष्ट इच्छा को दर्शाता है।
राजनीतिक पृष्ठभूमि में तारिक रहमान की वापसी और पारिवारिक शोक की छाया ने भी चुनावी माहौल को प्रभावित किया। लंबे निर्वासन के बाद देश लौटे तारिक रहमान के प्रति सहानुभूति और संगठनात्मक मजबूती—दोनों ने बीएनपी के पक्ष में माहौल बनाया।
निर्वाचन आयोग के अनुसार, मतदान प्रतिशत लगभग 59.44 रहा। परिणामों की घोषणा में हुई देरी पर सवाल उठे, जिस पर आयोग ने डाक मतपत्रों और सत्यापन प्रक्रिया का हवाला देते हुए स्थिति स्पष्ट की। वहीं, जमात-ए-इस्लामी ने देरी पर आपत्ति जताते हुए पारदर्शिता की मांग की है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाओं में भारत का संदेश प्रमुख रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तारिक रहमान को बधाई देते हुए इसे बांग्लादेशी जनता के विश्वास का प्रतिबिंब बताया और लोकतांत्रिक, समावेशी बांग्लादेश के साथ सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई।
कुल मिलाकर, जनादेश ने बांग्लादेश की राजनीति में नए अध्याय की शुरुआत का संकेत दे दिया है—जहां सत्ता की बागडोर बीएनपी गठबंधन के हाथ जाती दिख रही है और क्षेत्रीय राजनीति पर इसके दूरगामी प्रभाव पड़ने तय हैं।


