
एचएएल कानपुर में होगा निर्माण, आत्मनिर्भर भारत को नई गति
नई दिल्ली. देश की समुद्री सुरक्षा क्षमताओं को सुदृढ़ करने और रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की दिशा में रक्षा मंत्रालय ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मंत्रालय ने भारतीय तटरक्षक बल के लिए आठ स्वदेशी डॉर्नियर-228 विमानों की खरीद हेतु हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) के साथ 2,312 करोड़ रुपये का अनुबंध किया है। यह समझौता नई दिल्ली में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की उपस्थिति में संपन्न हुआ।
यह अनुबंध एचएएल के कानपुर स्थित परिवहन विमान प्रभाग में निष्पादित किया जाएगा, जहां इन विमानों का निर्माण किया जाएगा। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, ये विमान आधुनिक परिचालन उपकरणों से सुसज्जित होंगे और तटरक्षक बल की निगरानी, खोज एवं बचाव, समुद्री गश्त तथा तस्करी-रोधी अभियानों की क्षमता को उल्लेखनीय रूप से सुदृढ़ करेंगे।
स्वदेशी उत्पादन को मिलेगा बल
सरकार का मानना है कि इस परियोजना से न केवल एचएएल के उत्पादन तंत्र को मजबूती मिलेगी, बल्कि देशभर में फैले लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) तथा सहायक उद्योगों के व्यापक नेटवर्क को भी प्रोत्साहन मिलेगा। विमान निर्माण की इस प्रक्रिया से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के नए अवसर सृजित होने की संभावना है।
इसके अतिरिक्त, रखरखाव, मरम्मत और ओवरहॉल (एमआरओ) सेवाओं के साथ-साथ जीवन चक्र तकनीकी सहायता के क्षेत्र में दीर्घकालिक व्यावसायिक संभावनाएं भी विकसित होंगी, जिससे घरेलू एयरोस्पेस पारिस्थितिकी तंत्र को स्थायित्व मिलेगा।
समुद्री सुरक्षा ढांचे को मजबूती
डॉर्नियर-228 विमान अपनी विश्वसनीयता, बहुउद्देशीय उपयोगिता और कम दूरी से संचालन की क्षमता के लिए जाने जाते हैं। भारतीय तटरक्षक बल के बेड़े में इन विमानों के शामिल होने से समुद्री सीमाओं की निगरानी, तटीय सुरक्षा और आपदा प्रतिक्रिया अभियानों में गति और दक्षता आएगी।
रक्षा मंत्रालय ने कहा कि यह अनुबंध ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ पहल के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है। साथ ही, यह सौदा देश की समुद्री सुरक्षा संरचना को दीर्घकालिक रूप से सशक्त करने की दिशा में एक रणनीतिक निवेश माना जा रहा है।


