
नई दिल्ली. असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में होने वाले आगामी विधानसभा आम चुनावों को निष्पक्ष, पारदर्शी और कानूनसम्मत ढंग से संपन्न कराने की दिशा में भारत निर्वाचन आयोग ने तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी क्रम में चुनाव आयोग द्वारा नियुक्त किए जाने वाले 1,444 केंद्रीय पर्यवेक्षकों की दो दिवसीय गहन ब्रीफिंग बैठकें नई दिल्ली स्थित आईआईआईडीईएम में सफलतापूर्वक संपन्न हुईं।
निर्वाचन आयोग के अनुसार, यह ब्रीफिंग कार्यक्रम 5 और 6 फरवरी, 2026 को तीन चरणों में आयोजित किया गया, जिसमें देशभर से आए वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया। इनमें 714 सामान्य पर्यवेक्षक, 233 पुलिस पर्यवेक्षक और 497 व्यय पर्यवेक्षक शामिल थे। इन सभी अधिकारियों को चुनाव प्रक्रिया के विभिन्न संवेदनशील और तकनीकी पहलुओं पर विस्तृत जानकारी दी गई।

बैठकों के दौरान पर्यवेक्षकों को मतदाता सूची की तैयारी, चुनावी प्रक्रिया का संचालन, आदर्श आचार संहिता के अनुपालन, चुनावी खर्च की निगरानी, सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग और मीडिया प्रबंधन से जुड़े विषयों पर प्रशिक्षित किया गया। इसके साथ ही उन्हें इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) की कार्यप्रणाली, सुरक्षा व्यवस्था और शिकायत निवारण प्रणाली के बारे में भी विस्तार से अवगत कराया गया।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने निर्वाचन आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी के साथ ब्रीफिंग के अंतिम दिन केंद्रीय पर्यवेक्षकों के तीसरे बैच को संबोधित किया। इस दौरान संदेह निवारण सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें पर्यवेक्षकों ने अपने सवाल रखे और आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों ने उनका समाधान किया।
अपने संबोधन में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत में चुनाव संविधान और चुनाव कानूनों के दायरे में ही कराए जाते हैं और इस प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की लापरवाही या विचलन की कोई गुंजाइश नहीं है। उन्होंने पर्यवेक्षकों से अपेक्षा जताई कि वे चुनाव आयोग के सभी निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करें। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि पिछले एक वर्ष में आयोग द्वारा उठाए गए सुधारात्मक कदमों के अलावा आगामी विधानसभा चुनावों के लिए कुछ नए उपाय भी लागू किए जा रहे हैं, जिससे चुनाव प्रक्रिया और अधिक पारदर्शी बन सके।
चुनाव आयुक्त डॉ. एस.एस. संधू ने अपने संबोधन में कहा कि केंद्रीय पर्यवेक्षक निर्वाचन आयोग के सबसे महत्वपूर्ण प्रतिनिधि होते हैं और जब वे क्षेत्र में तैनात होते हैं, तो आयोग की साख और निष्पक्षता सीधे तौर पर उनसे जुड़ी होती है। उन्होंने पर्यवेक्षकों से उच्चतम स्तर के आचरण, निष्पक्षता और पेशेवर ईमानदारी बनाए रखने का आह्वान करते हुए सभी राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों को समान अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया।
वहीं, चुनाव आयुक्त डॉ. विवेक जोशी ने पर्यवेक्षकों से कहा कि चुनाव के दौरान प्राप्त होने वाली शिकायतों और आपत्तियों का त्वरित और निष्पक्ष समाधान अत्यंत आवश्यक है। इससे न केवल आम जनता का भरोसा मजबूत होता है, बल्कि राजनीतिक दलों का भी चुनावी प्रक्रिया पर विश्वास बढ़ता है। उन्होंने पिछले एक वर्ष में आयोग द्वारा शुरू की गई नई पहलों की जानकारी भी साझा की, जिन्हें हाल के बिहार विधानसभा चुनावों में प्रभावी ढंग से लागू किया गया था।
गौरतलब है कि भारत निर्वाचन आयोग संविधान के अनुच्छेद 324 और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 20बी के तहत प्राप्त व्यापक अधिकारों का प्रयोग करते हुए केंद्रीय पर्यवेक्षकों की नियुक्ति करता है। ये पर्यवेक्षक जमीनी स्तर पर चुनावी प्रक्रिया की निगरानी कर आयोग को स्वतंत्र, निष्पक्ष और सुचारु चुनाव संपन्न कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।


