नारीबारी में गूंजा ‘हर हर महादेव’, महात्रिशूल यात्रा पर श्रद्धालुओं ने की पुष्पवर्षा

प्रयागराज (आलोक गुप्ता). मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा से प्रारंभ होकर अयोध्या धाम की ओर अग्रसर महात्रिशूल यात्रा का उत्तर प्रदेश–मध्य प्रदेश सीमा क्षेत्र में श्रद्धा और उत्साह के साथ भव्य स्वागत किया गया। चौखटा बॉर्डर, नारीबारी चौराहा और बाबा बैजनाथ मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं ने आरती उतारकर यात्रा का अभिनंदन किया, जिसके उपरांत धर्मशाला में सनातन धर्म सभा का आयोजन हुआ।
सभा को संबोधित करते हुए यात्रा के प्रमुख अमित योगी ने कहा कि भगवान महादेव का महात्रिशूल शक्ति, साधना और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति की रक्षा के लिए प्रत्येक सनातनी को शस्त्र और शास्त्र—दोनों के महत्व को समझना चाहिए। उनके उद्बोधन के दौरान सभा स्थल ‘हर हर महादेव’ और ‘सनातन धर्म की जय’ के नारों से गूंज उठा।
नारीबारी से आगे बढ़ते हुए यात्रा का गन्ने, जारी, कांटी, गौहनिया, घूरपुर और नैनी चौराहे सहित कई स्थानों पर जोरदार स्वागत किया गया। नारीबारी में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने डीजे, पुष्पवर्षा और आरती के माध्यम से महात्रिशूल यात्रा का उत्साहपूर्वक अभिनंदन किया।
बताया गया कि इस यात्रा के साथ चल रहा महात्रिशूल लगभग 60 फीट ऊंचा और करीब सात टन वजनी है, जिसमें दस फीट ऊंचाई के दो छोटे त्रिशूल भी सम्मिलित हैं। यह यात्रा 2 फरवरी 2026 को छिंदवाड़ा (मध्य प्रदेश) से अयोध्या धाम के लिए रवाना हुई थी।
यात्रा के दौरान संयोजक अशोक मिश्र, विवेक केसरवानी, सूर्यकांत शुक्ल, महेन्द्र कुमार शुक्ल, राजकुमार, विद्याकांत शुक्ल, सत्यम शुक्ल, दीपक, पिंटू, सौरभ, डॉ. पी.के. पाठक, ऋषि मोदनवाल, शरद गुप्ता, लवकुश, बृजेश, सुशील, विशाल, मोनू, परशुराम शुक्ल, दिलीप चतुर्वेदी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
सनातन धर्म के संरक्षण और जन-जागरण के उद्देश्य से निकली इस महात्रिशूल यात्रा को हिंदू एकता के सशक्त प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है। यात्रा के प्रत्येक पड़ाव पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है और अमित योगी के नेतृत्व में यह यात्रा धर्म, संस्कृति और आस्था के संदेश को जन-जन तक पहुंचा रही है।
