फाइलेरिया मुक्त प्रयागराज की ओर बढ़े कदम, उरुवा और बहादुरपुर में विशेष अभियान

प्रयागराज (आलोक गुप्ता). जनपद प्रयागराज में फाइलेरिया उन्मूलन के प्रयास अब निर्णायक चरण में पहुंचते नजर आ रहे हैं। राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के तहत इस वर्ष 10 से 28 फरवरी तक केवल बहादुरपुर और उरुवा विकास खंडों में सर्वजन दवा सेवन (एमडीए) अभियान संचालित किया जाएगा, जिसके जरिए करीब 6.44 लाख लोगों को फाइलेरिया से सुरक्षा प्रदान की जाएगी।
इस संबंध में सीएमओ सभागार में आयोजित मीडिया संवेदीकरण कार्यशाला में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरुण कुमार तिवारी ने बताया कि बीते पांच वर्षों से चल रहे सतत अभियानों के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। हालिया नाइट ब्लड सर्वे में जिले के 21 ब्लॉकों में से केवल बहादुरपुर और उरुआ में ही संक्रमण की पुष्टि हुई है, जबकि शेष ब्लॉक लगभग संक्रमण मुक्त हो चुके हैं।
सीएमओ ने बताया कि अभियान को प्रभावी बनाने के लिए 87 सुपरवाइजरों की निगरानी में 516 स्वास्थ्य टीमें गठित की गई हैं, जो घर-घर जाकर पात्र लाभार्थियों को अपने सामने फाइलेरिया रोधी दवाएं खिलाएंगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि दवा का सेवन खाली पेट नहीं करना है और दो वर्ष से कम आयु के बच्चे, गर्भवती महिलाएं तथा गंभीर बीमारी से ग्रस्त व्यक्ति इस दवा के दायरे से बाहर रखे गए हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि इस अभियान में स्वास्थ्य विभाग के साथ पंचायती राज, शिक्षा, बाल विकास, सूचना सहित अन्य विभागों की सहभागिता सुनिश्चित की गई है। अभियान की शुरुआत ग्राम पंचायत स्तर पर जनप्रतिनिधियों द्वारा स्वयं दवा सेवन कराकर की जाएगी। सीएमओ ने मीडिया से आह्वान किया कि वे जन-जागरूकता बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभाएं, ताकि शत-प्रतिशत दवा सेवन सुनिश्चित किया जा सके।
कार्यशाला में अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी एवं वीबीडी नोडल अधिकारी डॉ. राजेश सिंह ने जानकारी दी कि जनपद में वर्तमान में हाथीपांव के 1,590 और हाइड्रोसील के 283 मरीज पंजीकृत हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार फाइलेरिया उन्मूलन के लिए सर्वजन दवा सेवन, रोग प्रबंधन, वाहक नियंत्रण, अंतरविभागीय समन्वय और डिजिटल नवाचार पर आधारित पांच स्तरीय रणनीति पर कार्य कर रही है।
जिला मलेरिया अधिकारी आनंद सिंह ने बताया कि फाइलेरिया उन्मूलन अभियान में अब समुदाय की सक्रिय भागीदारी को भी जोड़ा गया है। सीफार के सहयोग से जिले के पांच ब्लॉकों में सीएचओ के नेतृत्व में 30 पेशेंट स्टेकहोल्डर प्लेटफॉर्म (पीएसपी) गठित किए गए हैं, जिनसे जुड़े 560 सदस्य गांव-गांव जाकर लोगों को दवा सेवन के लिए प्रेरित कर रहे हैं। इनमें फाइलेरिया मरीज, ग्राम प्रधान, कोटेदार, आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, समूह सखी तथा शिक्षक शामिल हैं।
एमएलएन मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसर डॉ. एम.ए. हसन ने बताया कि फाइलेरिया रोधी दवाएं विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा प्रमाणित और पूर्णतः सुरक्षित हैं। उन्होंने कहा कि दवा लेने के बाद हल्का बुखार या चक्कर आना सामान्य प्रतिक्रिया है, जो शरीर में मौजूद सूक्ष्म कृमियों के नष्ट होने का संकेत है। उन्होंने चेतावनी दी कि दवा न लेना ही वास्तविक खतरा है, क्योंकि एक संक्रमित व्यक्ति पूरे गांव को संक्रमण के जोखिम में डाल सकता है।
फाइलेरिया क्या है
फाइलेरिया मच्छरों के माध्यम से फैलने वाली गंभीर बीमारी है, जिसके लक्षण कई वर्षों बाद हाथीपांव और हाइड्रोसील के रूप में उभरते हैं। हाइड्रोसील का शल्य उपचार संभव है, लेकिन हाथीपांव का कोई प्रभावी इलाज नहीं है। ऐसे में एमडीए अभियान के तहत दवा सेवन ही इससे बचाव का सबसे कारगर उपाय है। कार्यशाला में डब्ल्यूएचओ, पाथ, पीसीआई और सीफार के प्रतिनिधियों के साथ बड़ी संख्या में स्वास्थ्यकर्मी और मीडिया प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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