“ॐ तत् सत्” में आध्यात्मिक उन्नति और मोक्ष का मार्गः संत रामपाल

भदोही (संजय सिंह). संत रामपाल महाराज के आध्यात्मिक विचार और शास्त्र आधारित प्रवचन देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी व्यापक चर्चा का विषय बनते जा रहे हैं। शास्त्र-सम्मत भक्ति पद्धति और विभिन्न धार्मिक ग्रंथों की व्याख्या के माध्यम से वे आध्यात्मिक विमर्श में एक अलग पहचान स्थापित कर रहे हैं।
सत्संग के दौरान संत रामपाल महाराज ने दावा किया कि पवित्र ग्रंथों में निहित तत्वज्ञान को अब तक आम जनमानस के समक्ष स्पष्ट रूप से प्रस्तुत नहीं किया गया था। उन्होंने कहा कि विभिन्न धर्मग्रंथों के तुलनात्मक अध्ययन के माध्यम से उन्होंने पूर्ण मोक्ष के मार्ग को समझाने का प्रयास किया है, जो तत्वज्ञान और सद्गुरु की भूमिका पर आधारित है।
अपने प्रवचन में उन्होंने श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोकों का उल्लेख करते हुए कहा कि मोक्ष की प्राप्ति केवल कर्मकांड या आडंबर से नहीं, बल्कि शास्त्रानुकूल ज्ञान और सही मार्गदर्शन से ही संभव है। उन्होंने गीता के अध्याय 17, श्लोक 23 में वर्णित “ॐ तत् सत्” को आध्यात्मिक उन्नति और मोक्ष से जोड़ते हुए उसकी व्याख्या की।
सत्संग में उपस्थित श्रद्धालुओं ने संत रामपाल महाराज के विचारों को आत्मसात करने और उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प व्यक्त किया। साथ ही समाज में नैतिक मूल्यों और सद्भाव के प्रसार में योगदान देने की बात कही।
इस अवसर पर सत्येन्द्र दास, हरिनारायण दास, उदयप्रताप दास, भारतेश्वर दास, हर्षित दास, हरिश्चंद्र दास, विजय दास, रमाशंकर दास, रिया दासी, तारा दासी, कुसुम दासी सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।


