सिद्धि प्राप्ति के लिए आशीष दीक्षित ने करवाया खुद का कत्ल, हत्यारोपी दोस्त गिरफ्तार
प्रयागराज (आलोक गुप्ता). एसओजी यमुनानगर और करछना पुलिस ने नैनी के आशीष हत्याकांड का खुलासा कर दिया है। हत्याकांड के सातवें दिन पुलिस ने हत्या के मामले में आशीष दीक्षित के दोस्त नितीश सैनी को गिरफ्तार किया है। नितीश सैनी हरिद्वार, उत्तराखंड का रहने वाला है। पूछताछ में नितीश सैनी ने पुलिस को कहानी बताई है, वैसी कहानी, सिर्फ फिल्मों में ही देखने को मिलती है।
पुलिस के द्वारा किए गए खुलासे के मुताबिक सिद्धि साधना और पुनर्जन्म के लिए आशीष दीक्षित ने अपने दोस्त नितीश सैनी से खुद का कत्ल करवाया था। फिलहाल पुलिस ने हत्याभियुक्त नितीश की निशानदेही पर आलाकत्ल चापड़ बरामद कर लिया है।
उक्त हत्याकांड का खुलासा करते हुए पुलिस उपायुक्त सौरभ दीक्षित ने बताया कि करछना थाना क्षेत्र में 10 दिसंबर को अशोक लीलैंड के सर्विस सेंटर (मिर्जापुर रोड) के पीछे आशीष दीक्षित का शव पाया गया था। मामले में धारा 302 के तहत केस दर्जकर जांच की जा रही है। नैनी कोतवाली क्षेत्र के नंदन तालाब, अरैल निवासी आशीष दीक्षित हत्याकांड में उसके दोस्त नितीश सैनी को गिरफ्तार किया गया है।
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पूछताछ में नितीश सैनी पुत्र यशपाल सैनी (निवासी ग्राम निरंजनपुर, लश्कर, हरिद्वार, उत्तराखंड) ने बताया कि नितीश सैनी और नैनी निवासी आशीष दीक्षित पिछले छह माह से एक दूसरे को जानते थे। दोनों की मुलाकात हरिद्वार में हुई थी। इस दौरान आशीष की बातचीत से नितीश इतना प्रभावित हुआ कि उसने अपनी नौकरी छोड़ दी और आशीष के साथ रहने लगा। नितीश के परिवार वालों ने इसका विरोध किया, लेकिन नितीश के ऊपर कोई फर्क नहीं पड़ा। इस दौरान नितीश का सारा खर्च आशीष ही उठा रहा था,लेकिन कुछ समय के बाद आशीष खुद के द्वारा खर्च किया गया पैसा नितीश से मांगा जाने लगा। इस पर नितीश ने हालात सुधरने के बाद पैसा देने की बात कही।
हालांकि इसके बाद दोनों उत्तराखंड से यूपी चले आए। पुलिस उपायुक्त ने बताया कि आठ दिसंबर को दोनों ने एक साथ विंध्याचल धाम का दर्शन-पूजन किया था। अगले दिन, नौ दिसंबर को आशीष दीक्षित ने सिद्धि साधना और पुनर्जन्म के लिए पूजापाठ किया। इस दौरान आशीष ने नितीश को बर्बरीक और तमाम ऋषियों-मुनियों के पुनर्जन्म की कहानी यू-ट्यूब पर दिखाई और नितीश से कहा कि यदि वह उसके बताए नियमों के तहत उसे मार (बलि) देगा तो उसे सिद्धि प्राप्ति हो जाएगी और वह फिर से जीवित हो जाएगा। इसके बाद दोनों की परिस्थितियां ठीक हो जाएंगी।
आशीष दीक्षित ने इसके लिए नितीश को राजी कर लिया और तय प्रोग्राम के तहत दोनों अशोक लीलैंड सर्विस सेंटर के पीछे पहुंचे, जहां दोनों ने पूजा की और इसके बाद आशीष दीक्षित लेट गया। इसके पूर्व उसने एल्कोहल और कुछ दवाओं का सेवन किया। पूछताछ में नितीश ने पुलिस को बताया कि जब आशीष के शरीर में हरकत बंदहो गई तो उसने गला रेत दिया और वहां की गई पूजा की सामग्री को गंगा में फेंक दिया।
इस दौरान नितीश ने प्रयागराज स्टेशन पर आशीष दीक्षित के जीवित होकर लौटने का इंतजार किया, लेकिन नहीं लौटने पर वह हरिद्वार चला गया। फिलहाल आज के आधुनिक युग में नितीश द्वारा किए गए खुलासे पर यकीन करना थोड़ा मुश्किल है, लेकिन सत्य यही है। उक्त मामले का खुलासा करने वाली टीम में करछना प्रभारी निरीक्षक विश्वजीत सिंह, एसओजी यमुनानगर प्रभारी रंजीत सिंह, सर्विलांस टीम से प्रभारी शांतनु चतुर्वेदी अपनी पूरी टीम के साथ शामिल रहे।