ISRO टीएमयू कैंपस में खोलेगा स्पेस म्यूजियम
तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी में कृषि, मौसम पूर्वानुमान, शहरी और ग्रामीण नियोजन में सैटेलाइट रिमोट सेंसिंग के अनुप्रयोग पर हुई संगोष्ठी
मुरादाबाद (the live ink desk). अंतरिक्ष विज्ञान (space science) हमेशा से ही आमजनमानस में एक कौतूहल का विषय रहा है, लेकिन इसके विषय में लोगों का ज्ञान सीमित ही है। ऐसे में इन्हें जागरूक करने की आवश्यकता है। अतः इसरो (ISRO) अपने वैज्ञानिकों और पूर्व वैज्ञानिकों के माध्यम से अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी का ज्ञान विद्यालय और विश्वविद्यालय स्तर के छात्र- छात्राओं तक पहुँचाने का प्रयास कर रहा है, ताकि उनमें इस विषय के प्रति रूचि और ज्ञान दोनों बढ़े और इसरो को अच्छे भावी वैज्ञानिक मिल सकें। यह विचार स्पेस एप्लीकेशन सेंटर, इसरो, अहमदाबाद के जनरल डायरेक्टर रिटायर्ड वैज्ञानिक एसी माथुर ने व्यक्त किए।
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वह चार अक्टूबर से 10 अक्टूबर तक चल रहे विश्व अंतरिक्ष सप्ताह के अंतर्गत तीर्थंकर महावीर विश्वविद्यालय (Tirthankar Mahaveer University) के फैकल्टी ऑफ़ इंजीनियरिंग और कॉलेज ऑफ़ कंप्यूटिंग साइंसेज के तत्वावधान में आयोजित एक दिनी जागरूकता सेमिनार में बोल रहे थे। उन्होंने विश्वविद्यालय के अंदर स्पेस म्यूजियम (space museum) बनाने की इच्छा प्रकट की, ताकि आसपास के स्कूलों के स्टुडेंट्स को अंतरिक्ष विज्ञान की जानकारी आसानी से मिल सके।
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उन्होंने तीर्थंकर महावीर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रघुवीर सिंह को स्वलिखित दो पुस्तकें भी भेंट कीं। इससे पूर्व मेहमानों का बुके देकर स्वागत किया गया। संगोष्ठी में इसरो के भूतपूर्व वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. आलोक माथुर ने कृषि, मौसम पूर्वानुमान में सैटेलाइट रिमोट सेंसिंग के अनुप्रयोग विषय पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि रिमोट सेंसिंग का प्रयोग करके मौसम के बारे में पूर्वानुमान कैसे किया जाता हैl इसके साथ ही उन्होंने पोलर और लियो सेटेलाइट की जानकारी देते हुए बताया कि इंसेट 3 डी सॉफ्टवेयर से रेनफॉल मॉनिटरिंग कर सकते हैं।

उन्होंने छात्रों को प्रेरित किया कि भविष्य में भौतिक विज्ञान के साथ एआई और मशीन लर्निंग का उपयोग करके लंबे समय अंतराल तक मौसम के बारे में सटीक पूर्वानुमान किया जा सकता है, जो आज की एक बहुत बड़ी चुनौती है। आईआईआरएस, देहरादून के शहरी एवं ग्रामीण प्लानिंग विभाग के हेड डॉ संदीप मैथानी ने शहरी एवं ग्रामीण प्लानिंग में सेटेलाइट रिमोट सेंसिंग के अनुप्रयोग विषय पर प्रकाश डाला। उन्होंने शहरीकरण की परिभाषा को लोगों की संख्या के अनुपात से जोड़कर समझायाl बताया कि भारत में जिस तरह से छोटे-छोटे अनियोजित कस्बे फैल रहे हैं, इससे आने वाले समय में बाढ़, गंदगी, म्युनिसिपल वेस्ट के निस्तारण की समस्या उत्पन्न हो रही हैl इन सभी समस्याओं के निवारण के लिए केंद्र सरकार ने स्वच्छ भारत अभियान, स्मार्ट सिटी और अमृत विकास योजना सरीखी योजनाओं का संचालन किया हैl इसके साथ ही उन्होंने रिमोट सेंसिंग और जीआईएस की उपयोगिता के बारे में जानकारी दीl
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राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र, नई दिल्ली के डायरेक्टर जनरल (रिटायर) डॉ.विष्णु चंद्र ने कहा, इमेज प्रोसेसिंग में आर्टिफिसियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग जैसी आधुनिक तकनीकियों के आने से भूविज्ञान, अर्बन प्लांनिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर, इकोलॉजी जैसे क्षेत्रो में क्रांतिकारी परिवर्तन हुआ है। उन्होंने उम्मीद जताई, कंप्यूटर साइंस और सिविल इंजीनियरिंग के छात्र साथ में मिलकर इससे संबंधित अनेक चुनौतियों पर काम कर सकते हैं।
इसरो की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. खुशबू मिर्जा ने इसरो के चंद्रयान-1 और चंद्रयान-2 मिशन के विषय में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया की सैटेलाइट के प्रयोग से खाद्य सुरक्षा, जल सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण जैसे विषयों पर कार्य किया जाता है। उन्होंने जिओ स्पाटिअल और भुवन सॉफ्टवेयर के विषय में छात्रों को विषय में विस्तार से बताया।


