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वाराणसी मानव तस्करी केस: सात को उम्रकैद, दो महिलाएं भी आरोपी

वाराणसी। मानव तस्करी के एक चर्चित मामले में वाराणसी की फास्ट ट्रैक कोर्ट (प्रथम) ने बड़ा फैसला सुनाते हुए सात आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा दी है। फैसले में दो महिलाओं को भी दोषी माना गया है। अदालत ने सभी दोषियों पर 20-20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

सीसीटीवी ने खोला राज

यह मामला 16 मई 2023 को शुरू हुआ, जब सामने घाट निवासी संजय का चार वर्ष का बेटा घर के बाहर सोते समय अचानक लापता हो गया। पुलिस जांच में सीसीटीवी फुटेज से पता चला कि शिवदासपुर निवासी संतोष गुप्ता बच्चे को उठा ले गया था। 21 मई को पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया और उसके घर से बच्चे का बनियान बरामद हुआ। दो दिन बाद बच्चा भी मंडुवाडीह रेलवे स्टेशन के पास से सकुशल मिल गया। पूछताछ में मानव तस्करी के बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ, जिसके बाद अन्य आरोपियों के खिलाफ भी आरोपपत्र दाखिल किया गया।

कई आरोपित रिहा भी हुए

अपर्याप्त साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने नौ आरोपियों को बरी कर दिया। जबकि अभियोजन पक्ष की ओर से डीजीसी मुनीब सिंह चौहान, एडीजीसी मनोज कुमार गुप्ता और वादी पक्ष के अधिवक्ता गोपाल कृष्ण ने मजबूत पैरवी की। अदालत ने प्रस्तुत साक्ष्यों और तर्कों को स्वीकार करते हुए सातों आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा दी, जिसे डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इस मामले की बड़ी कानूनी कार्रवाई माना जा रहा है।

कौन-कौन दोषी करार दिए गए?

  • संतोष गुप्ता (मंडुवाडीह)
  • मनीष जैन (जयपुर)
  • महेश राणा (कोडरमा)
  • मुकेश पंडित (हजारीबाग)
  • महेश राणा (गिरिडीह)
  • शिखा (शिवदासपुर)
  • सुनीता देवी (गिरिडीह)

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