नीट पीजीः माइनस 40 अंक वालों को मौका देने के खिलाफ याचिका

प्रयागराज (आलोक गुप्ता). नीट पीजी-2025 परीक्षा में काउंसलिंग प्रक्रिया को लेकर इलाहाबाद उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका में नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशंस इन मेडिकल साइंसेज (एनबीईएमएस) द्वारा आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को 800 अंकों में माइनस 40 अंक प्राप्त करने के बावजूद काउंसलिंग की अनुमति दिए जाने के निर्णय को चुनौती दी गई है।
याचिकाकर्ता अधिवक्ता अभिनव गौर ने अदालत के समक्ष तर्क रखा है कि यह फैसला संविधान के अनुच्छेद 16(4) की भावना के विपरीत है। याचिका में कहा गया है कि नीट पीजी जैसी उच्चस्तरीय परीक्षा में कट-ऑफ अंकों में असाधारण कमी से मेरिट आधारित चयन प्रणाली की विश्वसनीयता और निष्पक्षता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
याचिका के अनुसार, 19 अगस्त 2025 को घोषित नीट पीजी-2025 के परिणाम मूल सूचना पुस्तिका में निर्धारित क्वालिफाइंग पर्सेंटाइल के अनुरूप थे। इसमें सामान्य व ईडब्ल्यूएस श्रेणी के लिए 50वां पर्सेंटाइल, सामान्य पीडब्ल्यूडी के लिए 45वां पर्सेंटाइल तथा एससी, एसटी और ओबीसी (पीडब्ल्यूडी सहित) वर्ग के लिए 40वां पर्सेंटाइल तय किया गया था।
हालांकि, काउंसलिंग के दूसरे चरण के बाद लगभग 18 हजार से अधिक सीटें खाली रहने के चलते बोर्ड ने क्वालिफाइंग मानकों में बड़ा बदलाव करते हुए आरक्षित वर्ग के लिए न्यूनतम स्कोर माइनस 40 अंक निर्धारित कर दिया। इसी तरह सामान्य (ईडब्ल्यूएस) वर्ग में कट-ऑफ 276 से घटाकर 103 और सामान्य पीडब्ल्यूडी वर्ग में 255 से घटाकर 90 कर दिया गया, जबकि एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग में इसे 235 से सीधे माइनस 40 कर दिया गया।
याचिका में यह भी आशंका जताई गई है कि इस तरह की छूट से चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। याचिकाकर्ता का कहना है कि न्यूनतम योग्यता मानकों को पूरा किए बिना चयनित होने वाले चिकित्सकों से सार्वजनिक स्वास्थ्य और मरीजों की सुरक्षा को खतरा उत्पन्न हो सकता है, जो संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत जीवन और स्वास्थ्य के अधिकार से जुड़ा गंभीर विषय है।

