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वैश्विक तनाव के बीच North Korea ने युद्धपोत से दागी क्रूज मिसाइल

The live ink desk. पूर्वी एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच उत्तर कोरिया ने एक बार फिर अपनी सैन्य क्षमता का प्रदर्शन करते हुए क्रूज मिसाइलों का परीक्षण किया है। यह परीक्षण ऐसे समय में किया गया है जब अमेरिका और दक्षिण कोरिया संयुक्त सैन्य अभ्यास में व्यस्त हैं, जिसे लेकर प्योंगयांग पहले से ही कड़ा विरोध जताता रहा है।

उत्तर कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी केसीएनए (KCNA) के अनुसार, मिसाइल परीक्षण नए विध्वंसक युद्धपोत से किया गया। परीक्षण के दौरान देश के सर्वोच्च नेता किम जोंग उन ने वीडियो लिंक के माध्यम से इसकी निगरानी की। बताया गया है कि मिसाइलों को पश्चिमी तट पर स्थित नाम्फो के पास से दागा गया, जहां से उन्होंने पीत सागर के ऊपर निर्धारित मार्ग पर उड़ान भरते हुए तय लक्ष्य को सफलतापूर्वक भेद दिया।

सरकारी मीडिया के अनुसार किम जोंग उन ने परीक्षण को देश की रणनीतिक हथियार प्रणाली के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि उत्तर कोरिया अपनी रक्षा क्षमता को लगातार आधुनिक तकनीक से सशक्त कर रहा है और परमाणु शक्ति से जुड़ी सैन्य क्षमताएं अब बहु-आयामी संचालन के नए चरण में प्रवेश कर रही हैं। उन्होंने युद्धपोत पर लगे नौसैनिक स्वचालित तोपों की क्षमता की भी समीक्षा करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

समाचार एजेंसी के मुताबिक किम जोंग उन ने यह परीक्षण अपनी किशोर बेटी के साथ एक अज्ञात स्थान से देखा। इससे पहले भी उत्तर कोरिया ने इसी युद्धपोत के औपचारिक कमीशनिंग से पहले क्रूज मिसाइल का परीक्षण किया था।

यह परीक्षण ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिका और दक्षिण कोरिया ने “फ्रीडम शील्ड” नाम से 11 दिन का संयुक्त सैन्य अभ्यास शुरू किया है। उत्तर कोरिया लंबे समय से इन अभ्यासों को अपने खिलाफ सैन्य कार्रवाई की तैयारी बताकर इसकी आलोचना करता रहा है।

सरकारी सूत्रों के अनुसार हाल के दिनों में उत्तर कोरिया ने दो लंबी दूरी की रणनीतिक क्रूज मिसाइलों का भी परीक्षण किया था। इन मिसाइलों ने लगभग दो घंटे पचास मिनट तक उड़ान भरने के बाद लक्ष्य को साधा। हालांकि उनकी वास्तविक दूरी का आधिकारिक खुलासा नहीं किया गया है।

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर कोरिया की लंबी दूरी की क्रूज मिसाइलें लगभग 2,000 किलोमीटर तक मार करने में सक्षम हो सकती हैं, जिससे जापान का बड़ा हिस्सा और वहां मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकाने भी उनकी पहुंच में आ सकते हैं। कम ऊंचाई पर उड़ान भरने और रास्ता बदलने की क्षमता के कारण ऐसी मिसाइलों को वायु रक्षा प्रणालियों के लिए रोक पाना अपेक्षाकृत कठिन माना जाता है।

ध्यान देने योग्य है कि संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंध मुख्य रूप से बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम पर लागू होते हैं, जबकि क्रूज मिसाइलें सीधे तौर पर उन प्रतिबंधों के दायरे में नहीं आतीं।

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