नई दिल्ली. लोकसभा में अध्यक्ष के विरुद्ध विपक्ष द्वारा लाया गया अविश्वास प्रस्ताव अंततः ध्वनिमत से अस्वीकार कर दिया गया। दो दिनों तक चली लंबी बहस के बाद सदन ने प्रस्ताव को खारिज कर दिया, जिसके साथ ही Om Birla लोकसभा अध्यक्ष के पद पर बने रहेंगे। बहस के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली।
विपक्ष ने पेश किया था प्रस्ताव
लोकसभा में अध्यक्ष के खिलाफ यह प्रस्ताव विपक्ष की ओर से पेश किया गया था। इसे Mohammad Jawed ने कई विपक्षी सांसदों के समर्थन के साथ सदन में रखा। प्रस्ताव के समर्थन में विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि सदन के संचालन के दौरान विपक्षी सदस्यों के साथ निष्पक्ष व्यवहार नहीं किया जा रहा है और उन्हें पर्याप्त अवसर नहीं मिल रहा।
हालांकि सत्ता पक्ष और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के नेताओं ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि अध्यक्ष सदन की परंपराओं और नियमों के अनुसार निष्पक्ष तरीके से कार्य कर रहे हैं।
अमित शाह ने किया अध्यक्ष का बचाव
बहस के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने अध्यक्ष की भूमिका का जोरदार समर्थन किया। उन्होंने कहा कि संसद की कार्यवाही आपसी विश्वास और स्थापित नियमों के आधार पर चलती है और अध्यक्ष की जिम्मेदारी सदन के निष्पक्ष संरक्षक के रूप में कार्य करना है।
उन्होंने कहा कि संसद कोई बाजार नहीं है, जहां बिना नियमों के चर्चा हो। सदस्यों से अपेक्षा की जाती है कि वे निर्धारित प्रक्रिया और संसदीय परंपराओं के अनुसार अपनी बात रखें। शाह ने कहा कि अध्यक्ष का पद सदन के दोनों पक्षों—सत्ता और विपक्ष—का प्रतिनिधित्व करता है और उसकी गरिमा बनाए रखना सभी सदस्यों की जिम्मेदारी है।
विपक्ष ने लगाए भेदभाव के आरोप
विपक्षी दलों के कई सांसदों ने बहस के दौरान कहा कि संसद में असहमति के लिए जगह सीमित होती जा रही है। Abhay Kumar Sinha ने कहा कि विपक्ष के कई सदस्यों को ऐसा महसूस होता है कि उन्हें सदन में पर्याप्त संरक्षण नहीं मिल रहा।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ अवसरों पर विपक्षी सांसदों को अपनी बात रखने से रोका गया और सदन में बड़ी संख्या में सांसदों के निलंबन जैसी घटनाएं भी हुईं, जिससे लोकतांत्रिक संवाद प्रभावित हुआ।
भाषण में बाधा का भी मुद्दा
बहस के दौरान Vijay Kumar Hansdak ने भी आरोप लगाया कि विपक्षी सांसदों को कई बार अपनी बात रखने में व्यवधान का सामना करना पड़ता है। उनके अनुसार जब विपक्ष के सदस्य बोलते हैं तो उन्हें बीच में रोका जाना आम बात बन गई है।
इसी तरह Bajrang Manohar Sonawane ने कहा कि विपक्ष को पहले से पता था कि संख्याबल के कारण प्रस्ताव पारित होना मुश्किल है, लेकिन इस बहस का उद्देश्य संसद में लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों को सामने लाना था।
ध्वनिमत से प्रस्ताव खारिज
दो दिन तक चली चर्चा के बाद जब प्रस्ताव को सदन के समक्ष निर्णय के लिए रखा गया तो बहुमत के आधार पर इसे ध्वनिमत से खारिज कर दिया गया। इसके साथ ही अध्यक्ष के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव समाप्त हो गया और Om Birla लोकसभा अध्यक्ष के पद पर बने रहेंगे।
संसदीय सूत्रों के अनुसार इस बहस ने सदन में सरकार और विपक्ष के बीच बढ़ती राजनीतिक तल्खी को भी उजागर किया, हालांकि अंततः संख्या बल के आधार पर सत्ता पक्ष का पक्ष भारी पड़ा।




