
The live ink desk. उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भारत की वैश्विक पहचान लगातार मजबूत हो रही है। अंतरराष्ट्रीय शिक्षा विश्लेषण संस्था ‘क्यूएस’ की हालिया रिपोर्ट के अनुसार भारत में अध्ययन करने आने वाले विदेशी छात्रों की संख्या में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक देश में विदेशी विद्यार्थियों की संख्या में औसतन आठ प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से बढ़ोतरी हो रही है।
लंदन स्थित संस्था की रिपोर्ट ‘ग्लोबल स्टूडेंट फ्लोज: इंडिया’ के अनुसार वर्ष 2025 में भारत में लगभग 58 हजार अंतरराष्ट्रीय छात्र विभिन्न विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों में पढ़ाई कर रहे हैं। अनुमान है कि मौजूदा रफ्तार बरकरार रही तो वर्ष 2030 तक भारत वैश्विक स्तर पर तेजी से उभरते शिक्षा केंद्रों में शामिल हो सकता है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि उच्च शिक्षा की अपेक्षाकृत कम लागत और प्रवेश व वीज़ा संबंधी प्रक्रियाओं की सरलता भारत को अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए आकर्षक बना रही है। इसके विपरीत अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे पारंपरिक शिक्षा गंतव्यों में बढ़ती फीस और कड़े वीज़ा नियमों के कारण कई छात्र वैकल्पिक देशों की तलाश कर रहे हैं।
भारत आने वाले विदेशी छात्रों में दक्षिण एशियाई देशों का योगदान सबसे अधिक है। नेपाल और बांग्लादेश से आने वाले छात्रों की हिस्सेदारी कुल संख्या का लगभग एक-तिहाई से अधिक बताई गई है। इसके अलावा उप-सहारा अफ्रीका के देशों से भी भारतीय विश्वविद्यालयों में पढ़ने की रुचि तेजी से बढ़ रही है, जहां की युवा आबादी के लिए भारत की शिक्षा लागत और गुणवत्ता एक संतुलित विकल्प के रूप में देखी जा रही है।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि भारतीय छात्र स्वयं भी अब पारंपरिक गंतव्यों से हटकर जर्मनी, फ्रांस और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों में उच्च शिक्षा के अवसर तलाश रहे हैं। अनुमान है कि वर्ष 2030 तक अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों में भारतीय छात्रों के नामांकन में हल्की गिरावट दर्ज हो सकती है।
हालांकि रिपोर्ट में यह भी संकेत दिया गया है कि यदि भारत को अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए अपनी बढ़ती लोकप्रियता बनाए रखनी है, तो उसे विश्वविद्यालय परिसरों, छात्रावासों और छात्र सहायता सेवाओं के ढांचे को और सुदृढ़ करना होगा, ताकि बढ़ती छात्र संख्या के अनुरूप सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।




