The live ink desk. पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच दो सप्ताह के अस्थायी संघर्षविराम पर सहमति बन गई है। इस समझौते के तहत अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर जारी हमले रोक दिए हैं, जबकि कूटनीतिक स्तर पर प्रत्यक्ष वार्ता की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी की जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक, 28 फरवरी से जारी टकराव के बाद यह पहला बड़ा कदम है, जिससे क्षेत्रीय तनाव में कमी आने की उम्मीद जताई जा रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा संघर्षविराम की घोषणा के बाद वैश्विक स्तर पर राहत की प्रतिक्रिया देखी गई है।
अमेरिकी प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने संकेत दिया है कि ईरान के साथ आमने-सामने की वार्ता के लिए एक प्रतिनिधिमंडल गठित किया जा रहा है। इसमें उपराष्ट्रपति JD Vance की अगुवाई संभावित मानी जा रही है। वार्ता का उद्देश्य दीर्घकालिक समझौते की रूपरेखा तैयार करना होगा।
संभावित वार्ता स्थल के रूप में Islamabad का नाम सामने आया है, जहां अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और Jared Kushner सहित अन्य वरिष्ठ प्रतिनिधियों की भागीदारी की संभावना जताई जा रही है। हालांकि आधिकारिक पुष्टि अभी शेष है।
इजराइल की ओर से प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने भी संघर्षविराम पर सहमति जता दी है, जिससे स्पष्ट है कि इजराइल इस अवधि में अमेरिकी रुख के अनुरूप सैन्य कार्रवाई से परहेज करेगा।
ईरान ने संघर्षविराम के दौरान Strait of Hormuz से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही को अपने नियंत्रण में रखने की बात कही है। ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के अनुसार, एक 10-सूत्रीय योजना पर सहमति बनी है, जिसमें इस सामरिक जलमार्ग के प्रबंधन को विशेष महत्व दिया गया है।
ईरान के विदेश मंत्री Seyyed Abbas Araghchi ने कहा कि होर्मुज से जहाजों का सुरक्षित आवागमन ईरानी सशस्त्र बलों के समन्वय और तकनीकी मानकों के अनुरूप ही सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने इस समझौते में Shehbaz Sharif और Asim Munir की मध्यस्थ भूमिका की सराहना की।
इससे पहले खाड़ी क्षेत्र में मिसाइल और ड्रोन हमलों को लेकर कई देशों ने चिंता जताई थी। संघर्षविराम की घोषणा अमेरिकी कार्रवाई की तय समयसीमा समाप्त होने से कुछ घंटे पहले हुई, जिससे संभावित बड़े सैन्य टकराव को टालने में मदद मिली।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया सामने आई है। António Guterres ने नागरिक ढांचे को निशाना बनाने वाली किसी भी सैन्य कार्रवाई को अनुचित बताया, जबकि Pope Leo ने युद्ध संबंधी धमकियों को अस्वीकार्य करार दिया।
विश्लेषकों के अनुसार, यह संघर्षविराम अस्थायी राहत जरूर देता है, लेकिन स्थायी समाधान के लिए प्रस्तावित कूटनीतिक वार्ताएं निर्णायक साबित होंगी।



