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वाराणसी से ‘स्कूल चलो अभियान’ का आगाजः ड्राप आउट दर सिर्फ तीन प्रतिशत

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बच्चों को बांटी पाठ्य सामग्री

वाराणसी. नए शैक्षिक सत्र 2026-27 के आगाज के साथ प्रदेश में नामांकन बढ़ाने और शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वाराणसी के शिवपुर स्थित कंपोजिट विद्यालय से “स्कूल चलो अभियान” का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने शैक्षिक नवाचार एवं उपलब्धियों से जुड़ी पुस्तिका का विमोचन भी किया।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने विभिन्न कक्षाओं के विद्यार्थियों को पाठ्यपुस्तकें और शैक्षणिक सामग्री वितरित कर अभियान का औपचारिक आगाज किया। इनमें कक्षा एक के छात्र विकास और अंशिका गुप्ता, कक्षा दो की छात्रा श्रेया सोनकर, कक्षा तीन की छात्रा कजरी, कक्षा चार की छात्रा दीपशिखा, कक्षा पांच की छात्रा रोली सोनकर, कक्षा छह की छात्राएं श्रेया यादव और कली केशरी, कक्षा सात की छात्रा रुचि यादव तथा कक्षा आठ की छात्रा साक्षी गुप्ता शामिल रहीं।

मुख्यमंत्री ने जनपद के पांच “निपुण विद्यालयों” के प्रधानाध्यापकों को भी सम्मानित किया। इनमें प्राथमिक विद्यालय नयापुर, प्राथमिक विद्यालय सगुनाहा, प्राथमिक विद्यालय फरीदपुर, कंपोजिट विद्यालय भसार और कंपोजिट विद्यालय महमूरगंज के प्रधानाध्यापक शामिल हैं। साथ ही “निपुण विद्यार्थी” के रूप में अभय कुमार पटेल, जानवी, श्रेयांश, नैंसी और सरस्वती को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए।

इस मौके पर बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने अभियान की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि 6 से 14 वर्ष आयु वर्ग के प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से जोड़ना इसका मुख्य उद्देश्य है। उन्होंने बताया कि पिछले नौ वर्षों में परिषदीय विद्यालयों में आधारभूत सुविधाओं के विस्तार, ड्रॉपआउट दर में कमी और नामांकन में वृद्धि जैसे महत्वपूर्ण सुधार हुए हैं।

मंत्री सिंह ने कहा कि “निपुण भारत अभियान” के तहत उत्तर प्रदेश देश में अग्रणी स्थान पर है। बालिकाओं की शिक्षा को सशक्त करने के लिए 746 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों को कक्षा 8 से बढ़ाकर 12 तक उन्नत किया जा रहा है, जबकि शेष ब्लॉकों में नए विद्यालय खोले जाएंगे।

उन्होंने यह भी बताया कि प्रारंभिक शिक्षा को मजबूत करने के लिए “बाल वाटिका” की शुरुआत की गई है, जहां 3 से 6 वर्ष तक के बच्चों को खेल-आधारित शिक्षण पद्धति के माध्यम से तैयार किया जाएगा। स्कूली शिक्षा पर कुल 80 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। ड्राप आउट दर में भारी कमी आई। यह 19 प्रतिशत से अब तीन प्रतिशत पर पहुंच गई है, जिसे शून्य किए जाने का लक्ष्य है।

संदीप सिंह ने समाज के सभी वर्गों से अभियान में सक्रिय भागीदारी की अपील करते हुए कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे। उन्होंने पूर्व की व्यवस्था पर टिप्पणी करते हुए कहा कि 2017 से पहले जहां शिक्षा व्यवस्था नकल पर आधारित थी, वहीं वर्तमान सरकार नकलविहीन परीक्षाओं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के जरिए विद्यार्थियों का भविष्य संवार रही है।

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