
The live ink desk. पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच International Energy Agency (आईईए) ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से जुड़े हालात को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है। एजेंसी के प्रमुख फतिह बिरोल ने कहा है कि मौजूदा परिस्थितियां वैश्विक स्तर पर अब तक के सबसे बड़े ऊर्जा संकट का रूप ले सकती हैं।
उनका आकलन है कि यह संकट 1973, 1979 और 2022 के ऊर्जा झटकों से भी अधिक व्यापक प्रभाव डाल सकता है, क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य (S trait of Hormuz)विश्व के प्रमुख तेल आपूर्ति मार्गों में से एक है और यहां किसी भी व्यवधान का सीधा असर वैश्विक सप्लाई चेन पर पड़ता है।
आईईए (IEA) के अनुसार, आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में सबसे अधिक दबाव विकासशील अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ेगा, जहां ईंधन महंगा होने से महंगाई और खाद्य कीमतों में तेजी आ सकती है। वहीं यूरोप, जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे विकसित देशों में भी ऊर्जा आपूर्ति घटने से औद्योगिक उत्पादन और आर्थिक गतिविधियों पर असर पड़ने की आशंका जताई गई है।
इस बीच अमेरिका-ईरान तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी हैं, जिससे वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ गई है।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि होर्मुज (Strait of Hormuz) क्षेत्र में स्थिति शीघ्र सामान्य नहीं होती, तो इसका असर लंबी अवधि तक वैश्विक अर्थव्यवस्था, व्यापार और मुद्रास्फीति पर दिखाई दे सकता है। ऊर्जा आपूर्ति में अनिश्चितता और भू-राजनीतिक जोखिमों के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में जोखिम प्रीमियम बढ़ रहा है, जिससे आने वाले समय में आर्थिक दबाव और गहरा सकता है।
