
The live ink desk. पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत ने ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में उल्लेखनीय कूटनीतिक सफलता हासिल की है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे संवेदनशील समुद्री मार्ग से भारतीय जहाजों का सुरक्षित पार होना न केवल राहत की खबर है, बल्कि भारत की सक्रिय और संतुलित विदेश नीति का भी संकेत देता है।
ताजा घटनाक्रम में भारत का एलपीजी टैंकर ‘ग्रीन सानवी’ सफलतापूर्वक हॉर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) पार कर गया है। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के चलते इस मार्ग पर वैश्विक शिपिंग लगभग ठप पड़ चुकी है। ईरान द्वारा मार्ग पर लगाए गए प्रतिबंधों ने अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा आपूर्ति पर गंभीर असर डाला है, जिससे विश्व स्तर पर संकट की आशंका गहराई हुई है।
ऐसे चुनौतीपूर्ण माहौल में भारत ने चरणबद्ध तरीके से अपने जहाजों को सुरक्षित बाहर निकालने में सफलता पाई है। ‘ग्रीन सानवी’ के अलावा ‘शिवालिक’, ‘नंदा देवी’, ‘जग लाड़की’, ‘पाइन गैस’, ‘जग वसंत’, ‘बीडब्ल्यू टायर’ और ‘बीडब्ल्यू एल्म’ जैसे कुल आठ जहाज अब तक इस मार्ग से सुरक्षित गुजर चुके हैं। यह उपलब्धि भारत को उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में खड़ा करती है, जिनके सर्वाधिक जहाज इस संकटग्रस्त क्षेत्र से सुरक्षित निकले हैं।
इसके अतिरिक्त ‘ग्रीन आशा’ और ‘जग विक्रम’ नामक दो अन्य जहाज भी जल्द ही इस मार्ग को पार कर भारत पहुंचने की तैयारी में हैं। हालांकि, अभी भी 15 से अधिक भारतीय ध्वज वाले जहाज हॉर्मुज के प्रवेश द्वार पर फंसे हुए हैं, जिन पर करीब 485 भारतीय नाविक सवार हैं। सरकार इनकी सुरक्षित निकासी के लिए लगातार कूटनीतिक स्तर पर प्रयासरत है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह सफलता भारत की ऊर्जा सुरक्षा नीति की मजबूती को दर्शाती है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का अहम केंद्र है, जहां से दुनिया का लगभग 20 से 30 प्रतिशत कच्चा तेल गुजरता है। इसकी भौगोलिक स्थिति अत्यंत संकरी है—सबसे कम चौड़ाई करीब 33 किलोमीटर—जिसके एक ओर ईरान और दूसरी ओर ओमान स्थित हैं।
तनाव के बीच सकारात्मक संकेत यह भी हैं कि भारत और ईरान के बीच संवाद बना हुआ है। हाल ही में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने संकेत दिया था कि मित्र देशों के जहाज, यदि समन्वय बनाए रखें, तो इस मार्ग से गुजर सकते हैं। भारत को ऐसे देशों में शामिल किया गया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि द्विपक्षीय संबंध इस संकट में भी मजबूत बने हुए हैं।
कुल मिलाकर, चुनौतीपूर्ण अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के बावजूद भारत ने संतुलित कूटनीति और त्वरित रणनीतिक निर्णयों के जरिए अपनी ऊर्जा आपूर्ति को बाधित नहीं होने दिया है।


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