शिक्षामित्रों के नियमितीकरण पर दो माह में निर्णय ले राज्य सरकारः हाईकोर्ट

प्रयागराज (आलोक गुप्ता). इलाहाबाद उच्च न्यायालय (Allahabad High Court) ने प्रदेश में कार्यरत शिक्षामित्रों के नियमितीकरण और उन्हें सहायक अध्यापक के समकक्ष वेतन देने की मांग पर राज्य सरकार को समयबद्ध निर्णय लेने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस मुद्दे पर दो माह के भीतर कारणयुक्त (reasoned) आदेश पारित किया जाए।
Allahabad High Court की न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की एकल पीठ ने देवरिया निवासी निघत फिरदौस की याचिका का निस्तारण करते हुए कहा कि याची सहित सभी संबंधित पक्ष तीन सप्ताह के भीतर अपने-अपने दावे, दस्तावेजों और विस्तृत प्रत्यावेदन (detailed representation) राज्य सरकार के समक्ष प्रस्तुत करें। इसके बाद सरकार सभी पक्षों को सुनवाई का अवसर देते हुए लागू विधिक प्रावधानों और पूर्व न्यायिक निर्णयों के आधार पर फैसला ले।
कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी उल्लेख किया कि निर्णय लेते समय सुप्रीम कोर्ट के पूर्ववर्ती फैसलों—विशेषकर ‘जग्गो बनाम भारत संघ’ और ‘श्रीपाल एवं अन्य’ प्रकरण—के साथ-साथ केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा 11 जून 2025 को जारी दिशा-निर्देशों को ध्यान में रखा जाए।
याचिका में कहा गया था कि याची लंबे समय से शिक्षामित्र के रूप में कार्यरत है और समान कार्य (equal work) के आधार पर उसे सहायक अध्यापक के समान वेतन (salary parity) दिया जाना चाहिए। इस संबंध में पहले भी ‘तेज बहादुर मौर्य व 114 अन्य’ मामले में न्यायालय निर्देश दे चुका है, जिसमें समान प्रकृति के विवाद पर राज्य सरकार को विचार करने के लिए कहा गया था।
कोर्ट ने वर्तमान याचिका को उसी न्यायिक दृष्टांत (judicial precedent) के अनुरूप निपटाते हुए कहा कि अपर मुख्य सचिव, बेसिक शिक्षा, लखनऊ के माध्यम से राज्य सरकार इस विषय पर विधिसम्मत (legally sustainable) निर्णय सुनिश्चित करे।



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