The live ink desk. पश्चिम एशिया में हालिया तनाव के बीच ईरान ने अमेरिका के साथ प्रत्यक्ष वार्ता शुरू करने की औपचारिक घोषणा की है। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, दोनों देशों के बीच बातचीत शुक्रवार से Islamabad में शुरू होगी। यह पहल हाल ही में घोषित दो सप्ताह के संघर्षविराम के बाद सामने आई है।
ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने स्पष्ट किया है कि वार्ता का एजेंडा उसके 10-सूत्रीय प्रस्ताव पर आधारित होगा। इस प्रस्ताव में प्रमुख रूप से Strait of Hormuz पर नियंत्रण और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को हटाने की मांग शामिल है।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान ने अमेरिका के साथ अस्थायी युद्धविराम को भी स्वीकार किया है, जिसके बाद कूटनीतिक संवाद की राह खुली है। तेहरान का कहना है कि बातचीत सीमित दायरे में होगी और केवल प्रस्तावित बिंदुओं पर ही केंद्रित रहेगी।
यह घटनाक्रम अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के हालिया बयान के बाद सामने आया है, जिसमें उन्होंने ईरान पर संभावित हमलों—विशेषकर ऊर्जा प्रतिष्ठानों और बुनियादी ढांचे—को लेकर दी गई धमकियों को फिलहाल वापस लेने और दो सप्ताह तक सैन्य कार्रवाई न करने की बात कही थी।
वाशिंगटन की ओर से यह भी संकेत दिया गया है कि आगे की प्रगति काफी हद तक होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति पर निर्भर करेगी। अमेरिका चाहता है कि यह समुद्री मार्ग तत्काल और सुरक्षित रूप से खोला जाए। यह जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण है, जहां से दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत गुजरता है।
उल्लेखनीय है कि 28 फरवरी को तनाव बढ़ने के बाद ईरान ने इस मार्ग पर नियंत्रण कड़ा कर दिया था, जिससे अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति प्रभावित हुई और कीमतों में उछाल दर्ज किया गया। इसके साथ ही खाड़ी क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां तेज हुईं और ईरान समर्थित समूहों—हिजबुल्लाह तथा हूती—की सक्रियता भी बढ़ी।
विश्लेषकों का मानना है कि प्रस्तावित वार्ता से क्षेत्रीय तनाव कम करने का अवसर मिल सकता है, लेकिन होर्मुज और प्रतिबंधों जैसे जटिल मुद्दों पर सहमति बनाना चुनौतीपूर्ण रहेगा।



