ताज़ा खबरसंसार

Iran War:ड्रोन हमले से तेल टैंकर क्षतिग्रस्त, इस्फहान में अमेरिकी एयर स्ट्राइक

The live ink desk. पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच खाड़ी क्षेत्र में एक तेल टैंकर पर ड्रोन हमले की घटना सामने आई है। दुबई के निकट हुए इस हमले में कुवैत के झंडे वाले ‘अल-सल्मी’ नामक जहाज को नुकसान पहुंचा, हालांकि आग पर समय रहते काबू पा लिया गया। राहत की बात यह रही कि न तो चालक दल के किसी सदस्य को चोट आई और न ही तेल का रिसाव हुआ।

जहाज के स्वामित्व वाली कंपनी कुवैत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन ने पुष्टि की कि हमला होने के बाद पोत को आंशिक क्षति पहुंची। शिपिंग डेटा के अनुसार, यह टैंकर चीन के किंगदाओ की ओर बढ़ रहा था और इसमें बड़ी मात्रा में सऊदी और कुवैती कच्चा तेल लदा था।

इस घटना को हॉर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र में हाल के दिनों में बढ़ी सैन्य गतिविधियों के संदर्भ में देखा जा रहा है, खासकर तब जब संयुक्त राज्य अमेरिका और इज़रायल द्वारा ईरान से जुड़े ठिकानों पर हमलों के बाद तनाव और गहरा गया है।

ईरान का पक्ष और दावा

ईरान के इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने बयान जारी कर कहा कि उसने खाड़ी में एक ऐसे कंटेनर जहाज को निशाना बनाया, जिसका संबंध इज़रायल से बताया गया। हालांकि प्रारंभिक रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि वास्तविक लक्ष्य कोई अन्य पोत हो सकता था, जो हमले के समय पास में मौजूद था।

आईआरजीसी के खातम अल-अनबिया मुख्यालय के प्रवक्ता इब्राहिम जोलफाघरी ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि ईरान अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए किसी भी स्तर तक जाने को तैयार है और किसी भी आक्रमण का “कड़ा जवाब” दिया जाएगा।

इस्फहान में अमेरिकी कार्रवाई

इसी बीच, इस्फहान में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में संयुक्त राज्य अमेरिका ने ईरान के एक कथित हथियार भंडार पर हवाई हमला किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस ऑपरेशन में बंकर-बस्टर बमों का इस्तेमाल किया गया, जो भूमिगत ठिकानों को नष्ट करने में सक्षम होते हैं।

हमले के बाद क्षेत्र में कई विस्फोटों और आग के बड़े गुबार देखे गए। डोनाल्ड ट्रम्प ने भी इस कार्रवाई से जुड़े दृश्य सोशल मीडिया पर साझा किए हैं।

विश्लेषकों का मानना है कि हालिया घटनाएं खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता को और बढ़ा सकती हैं, जहां ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग स्थित हैं। लगातार बढ़ती सैन्य गतिविधियां आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर सकती हैं।


Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button