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Jewar Airport: घने कोहरे और खराब मौसम में भी उड़ान भरेंगे हवाई जहाज

नोएडा. नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (Jewar Airport/Noida Airport) के शुरू होने के साथ ही देश के विमानन क्षेत्र को अत्याधुनिक तकनीकी क्षमता वाला नया केंद्र मिल गया है। यहां ऐसी उन्नत प्रणाली विकसित की गई है, जिससे घने कोहरे, कम दृश्यता और बारिश जैसी प्रतिकूल परिस्थितियों में भी विमान सुरक्षित रूप से उड़ान भर सकेंगे और लैंडिंग कर सकेंगे।

एयरपोर्ट (Jewar Airport/Noida Airport) के पहले चरण के तहत 3.9 किलोमीटर लंबा और 45 मीटर चौड़ा रनवे तैयार किया गया है। इस रनवे पर अत्याधुनिक इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (ILS) कैट-III तकनीक स्थापित की गई है, जो बेहद कम विजिबिलिटी में भी विमान संचालन को संभव बनाती है। इस तकनीक के जरिए पायलट दृश्यता लगभग शून्य होने की स्थिति में भी सुरक्षित लैंडिंग कर सकते हैं।

अधिकारियों के अनुसार, इस सुविधा के साथ नोएडा एयरपोर्ट देश का तीसरा ऐसा हवाई अड्डा बन गया है, जहां समानांतर उड़ान और लैंडिंग (Parallel Operations) संभव होगी। इससे पहले यह सुविधा इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा और छत्रपति शिवाजी महाराज अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा पर उपलब्ध है।

यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण के अधिकारियों ने बताया कि एयरपोर्ट को पूर्ण क्षमता पर संचालित किए जाने पर यहां प्रति घंटे लगभग 30 विमानों की लैंडिंग और टेकऑफ संभव होगा। इससे एयर ट्रैफिक प्रबंधन अधिक सुगम होगा और यात्रियों को समयबद्ध सेवाएं मिल सकेंगी।

परियोजना को चार चरणों में विकसित किया जा रहा है। पहले चरण में एक रनवे तैयार हो चुका है, जबकि आगामी चरणों में कुल छह रनवे विकसित किए जाएंगे। इस महत्वाकांक्षी परियोजना की अनुमानित लागत करीब ₹29,561 करोड़ है और वर्ष 2050 तक इसके सभी चरणों को पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह एयरपोर्ट (Jewar Airport/Noida Airport) न केवल तकनीकी दृष्टि से उन्नत होगा, बल्कि उत्तर भारत में हवाई यातायात के दबाव को कम करने और क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने में भी अहम भूमिका निभाएगा।

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