
The live ink desk. पश्चिम एशिया में सामरिक तनाव एक बार फिर चरम पर है। दुनिया के सबसे व्यस्त तेल मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान और अमेरिका आमने-सामने हैं, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और कूटनीतिक संतुलन पर असर पड़ने की आशंका गहरा गई है।
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर जारी गतिरोध अब सुलझने के बजाय और जटिल होता दिख रहा है। ईरान ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह इस रणनीतिक समुद्री मार्ग को तभी पूरी तरह खोलेगा, जब संयुक्त राज्य अमेरिका उसकी समुद्री सीमाओं और बंदरगाहों पर जारी सैन्य घेराबंदी समाप्त करेगा।
ईरान के उप विदेश मंत्री सईद खतीबजादेह ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अमेरिका के रुख को “हठधर्मी” बताते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच प्रस्तावित नए वार्ता दौर की अभी तक कोई तारीख तय नहीं हो सकी है। उनका कहना है कि तेहरान किसी भी समझौते के लिए अंतरराष्ट्रीय कानून के ढांचे के भीतर बातचीत को तैयार है, लेकिन दबाव की राजनीति स्वीकार नहीं करेगा।
दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कर दिया है कि जब तक कोई ठोस समझौता नहीं होता, तब तक ईरानी बंदरगाहों पर नौसैनिक दबाव जारी रहेगा। उन्होंने यह भी दोहराया कि वाशिंगटन किसी भी प्रकार के दबाव में निर्णय नहीं लेगा।
कूटनीतिक प्रयासों के समानांतर सैन्य गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। ईरानी सेना ने दावा किया है कि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य पर “पूर्ण नियंत्रण” स्थापित कर लिया है और चेतावनी दी है कि जब तक अमेरिकी नाकेबंदी जारी रहेगी, इस मार्ग से जहाजों की आवाजाही बाधित की जा सकती है। इस बीच ब्रिटिश सूत्रों ने आरोप लगाया कि ईरानी गनबोट्स ने एक टैंकर पर गोलीबारी की, जबकि भारत ने भी अपने दो जहाजों को निशाना बनाए जाने की पुष्टि की है।
ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघर ग़ालिबाफ ने संकेत दिया कि वार्ता में कुछ प्रगति जरूर हुई है, लेकिन अंतिम समझौता अभी दूर है। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों के बीच भरोसे की कमी सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है।
इस तनाव का असर व्यापक क्षेत्रीय परिदृश्य पर भी पड़ रहा है। इजराइल और लेबनान के बीच दक्षिणी क्षेत्र में झड़पें जारी हैं। इजराइली सेना के अनुसार, हालिया संघर्ष में उसके एक सैनिक की मौत हुई है, जिससे मृतकों की संख्या बढ़कर 14 हो गई है।
वहीं, इमैनुएल मैक्रों ने लेबनान में हुए हमले के लिए हिज्बुल्लाह को जिम्मेदार ठहराया है, हालांकि संगठन ने इन आरोपों से इनकार किया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ता तनाव वैश्विक तेल आपूर्ति पर सीधा असर डाल सकता है, क्योंकि दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल का परिवहन इसी मार्ग से होता है। ऐसे में यदि गतिरोध लंबा खिंचता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा संकट और कीमतों में उछाल की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।



