फर्जी ‘कांसुलेट’ केस में हर्षवर्धन को राहत: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दी जमानत

प्रयागराज (आलोक गुप्ता). गाजियाबाद में कथित रूप से फर्जी दूतावास संचालित करने और खुद को विदेशी राजनयिक बताने के आरोप में गिरफ्तार हर्षवर्धन जैन (49 वर्ष) को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जमानत दे दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति आशुतोष श्रीवास्तव की एकल पीठ ने सुनाया।
मामले के अनुसार, उत्तर प्रदेश एसटीएफ ने आरोपी को जुलाई 2025 में गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसी के मुताबिक, जैन ने खुद को ‘वेस्ट आर्कटिका’ नामक कथित देश का प्रतिनिधि बताते हुए एक फर्जी कांसुलेट कार्यालय संचालित किया। आरोप है कि उसने विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों से संपर्क साधा और प्रभाव बनाने के लिए नकली राजनयिक पहचान का इस्तेमाल किया।
बरामदगी में फर्जी दस्तावेज और वाहन
एसटीएफ की कार्रवाई में आरोपी के पास से कथित फर्जी कूटनीतिक पासपोर्ट, कई संदिग्ध दस्तावेज और डिप्लोमैटिक नंबर प्लेट लगी गाड़ियां बरामद की गई थीं। जांच एजेंसियों का दावा है कि ये सभी सामग्री उसकी गतिविधियों को विश्वसनीय दिखाने के उद्देश्य से उपयोग की जा रही थी।
बचाव पक्ष का तर्क: ‘स्मृति चिन्ह’ मात्र
आरोपी की ओर से अदालत में दलील दी गई कि जब्त किए गए पासपोर्ट और नंबर प्लेट केवल नॉवेल्टी आइटम (स्मृति चिन्ह) थे और उनका उपयोग किसी आधिकारिक या धोखाधड़ीपूर्ण उद्देश्य से नहीं किया गया। साथ ही यह भी कहा गया कि अब तक किसी भी व्यक्ति द्वारा ठगी की औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है।
सरकार का विरोध, कोर्ट ने दी राहत
राज्य सरकार ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि जांच में आरोपी की संलिप्तता के पर्याप्त साक्ष्य मिले हैं। हालांकि अदालत ने यह माना कि जांच पूरी हो चुकी है और चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है, ऐसे में आरोपी को अनिश्चितकाल तक हिरासत में रखना उचित नहीं है। इन्हीं परिस्थितियों के आधार पर अदालत ने आरोपी को सशर्त जमानत प्रदान कर दी।


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