गाजियाबाद में आग का तांडवः 150 से ज्यादा झुग्गियां राख, छह बच्चे लापता

लखनऊ (विजय मिश्र). उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के इंदिरापुरम थाना क्षेत्र स्थित कनावनी बस्ती में गुरुवार दोपहर हुए भीषण अग्निकांड ने व्यापक नुकसान पहुंचाया। प्रारंभिक आकलन के अनुसार, 150 से अधिक झुग्गियां जलकर पूरी तरह नष्ट हो गईं, जिससे 300–400 से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। घटना के दौरान छह बच्चों के लापता होने की आशंका जताई जा रही है, हालांकि प्रशासन ने अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
तेज हवा और धमाकों से बेकाबू हुई आग
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दोपहर में अचानक एक झुग्गी में आग भड़की, जो तेज हवा के कारण तेजी से फैलती चली गई। बस्ती में रखे रसोई गैस सिलेंडरों में हुए कई विस्फोटों ने आग को और विकराल बना दिया। लगातार धमाकों से पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया और लोगों को जान बचाकर भागना पड़ा।
दमकल की 12+ गाड़ियां, घंटों चला ऑपरेशन
सूचना मिलते ही पुलिस और दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं। आग बुझाने के लिए एक दर्जन से अधिक फायर टेंडर लगाए गए और कई घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका। फिलहाल क्षेत्र में कूलिंग ऑपरेशन और सर्च अभियान जारी है।
पुलिस उपायुक्त धवल जायसवाल ने बताया कि आग पर नियंत्रण के बाद पूरे इलाके की सघन तलाशी ली जाएगी, ताकि किसी के फंसे होने या लापता होने की स्थिति स्पष्ट हो सके।
कबाड़ गोदाम से आग फैलने की आशंका
प्राथमिक जांच में आग लगने का संभावित कारण झुग्गी के पास स्थित कबाड़ गोदाम में लगी आग माना जा रहा है, जो तेजी से फैलकर पूरी बस्ती तक पहुंच गई। हालांकि, प्रशासन ने विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं और अन्य संभावित कारणों की भी पड़ताल की जा रही है।
जिलाधिकारी रविंद्र कुमार मंदाड़ के अनुसार, प्रभावित क्षेत्र में लगभग 150 झुग्गियां थीं और मौके पर दमकल, एंबुलेंस तथा राहत टीमें तैनात कर दी गई हैं। अभी तक किसी के हताहत होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
अग्नि सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
इस हादसे के बाद बड़ी संख्या में लोग बेघर हो गए हैं। प्रभावित परिवारों के सामने रहने और भोजन की गंभीर समस्या खड़ी हो गई है। प्रशासन ने राहत शिविरों की व्यवस्था शुरू कर दी है और नुकसान का आकलन कर मुआवजा देने की प्रक्रिया प्रारंभ की जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि शहरी झुग्गी बस्तियों में आग की घटनाएं अक्सर एलपीजी सिलेंडर, अवैध बिजली कनेक्शन और ज्वलनशील कबाड़ सामग्री के कारण होती हैं। घनी आबादी और संकरी गलियों के कारण ऐसे हादसे तेजी से विकराल रूप ले लेते हैं।




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