लखनऊ में भीषण अग्निकांड: दो बहनों की मौत, आठ घंटे में बुझाई गई आग

लखनऊ (विजय मिश्र). उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के विकासनगर क्षेत्र स्थित रिंग रोड किनारे की घनी झुग्गी बस्ती बुधवार शाम अचानक भीषण आग की चपेट में आ गई। प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार, इस अग्निकांड में 200 से अधिक झुग्गियां प्रभावित हुई हैं और सैकड़ों लोग बेघर हो गए हैं। हादसे में दो मासूम बहनों—श्रेया (2 वर्ष) और स्वाति (2 माह)—की जलकर मौत हो गई, जिनके शव मलबे से बरामद कर पोस्टमार्टम के लिए भेजे गए हैं।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, घटना के समय बस्ती में अफरा-तफरी मच गई। शुरुआती सूचना में करीब 6 बच्चों के लापता होने की बात सामने आई थी, जिनमें से दो की पुष्टि हो चुकी है, जबकि अन्य की तलाश के लिए सर्च ऑपरेशन जारी है।
सिलेंडर धमाकों ने बढ़ाई तबाही
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग लगने के बाद रसोई गैस सिलेंडरों में लगातार हुए धमाकों ने हालात को और विकराल बना दिया। ज्वलनशील सामग्री और सघन बस्ती होने के कारण आग तेजी से फैलती चली गई। देखते ही देखते पूरी बस्ती आग की लपटों में घिर गई।
दमकल विभाग के मुताबिक, आग बुझाने के लिए 12 से अधिक फायर टेंडर मौके पर लगाए गए और करीब 8 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका। राहत कार्य में एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें भी तैनात की गई हैं, जो मलबे में लगातार तलाशी अभियान चला रही हैं।
प्रशासन अलर्ट, राहत कार्य तेज
घटना के बाद प्रशासन ने तत्काल राहत कार्य शुरू कर दिया। जिलाधिकारी विशाख जी अय्यर ने बताया कि प्रभावित परिवारों को अस्थायी रूप से रैन बसेरों में शिफ्ट किया जा रहा है, जहां भोजन, पेयजल और प्राथमिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
प्रारंभिक सर्वे में करोड़ों रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है। प्रशासन द्वारा क्षति का आकलन कर मुआवजा वितरण प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
केंद्र व राज्य सरकार ने लिया संज्ञान
घटना पर रक्षा मंत्री एवं लखनऊ सांसद राजनाथ सिंह ने जिला प्रशासन से विस्तृत रिपोर्ट तलब करते हुए प्रभावितों के शीघ्र पुनर्वास के निर्देश दिए हैं। वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को मौके पर भेजकर आग के कारणों की जांच और पीड़ितों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराने को कहा है।
जांच के घेरे में हादसे के कारण
प्रशासन ने आग लगने के कारणों की जांच शुरू कर दी है। शुरुआती तौर पर गैस सिलेंडर विस्फोट को मुख्य वजह माना जा रहा है, लेकिन किसी भी संभावित साजिश की संभावना से इनकार नहीं किया गया है।
यह घटना शहरी झुग्गी बस्तियों में अग्नि सुरक्षा के अभाव, संकरी गलियों, अव्यवस्थित निर्माण और ज्वलनशील सामग्री के जोखिम को एक बार फिर उजागर करती है, जहां छोटी सी चिंगारी भी बड़े हादसे का रूप ले सकती है।



