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पश्चिम एशिया में 10 दिन की राहत: इजराइल–हिज्बुल्लाह संघर्ष पर अस्थायी विराम

The live ink desk. पश्चिम एशिया में जारी सैन्य टकराव के बीच इजराइल और ईरान समर्थित संगठन हिज्बुल्लाह के बीच 10 दिन के संघर्ष विराम (सीजफायर) की घोषणा की गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अनुसार, लेबनान के राष्ट्रपति जनरल जोसेफ औन और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। तय समय के अनुसार, दोनों पक्ष स्थानीय समयानुसार शाम 5 बजे (भारतीय समयानुसार रात 2:30 बजे) से हमले रोकने पर सहमत हुए।

कूटनीतिक सक्रियता तेज, अमेरिका की भूमिका अहम

अमेरिकी प्रशासन ने इस समझौते को लागू कराने के लिए उच्चस्तरीय रणनीतिक टीम को सक्रिय किया है। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विदेश मंत्री मार्को रूबियो और ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन को समन्वय की जिम्मेदारी सौंपी गई है। व्हाइट हाउस ने दोनों देशों के नेताओं को आगे की वार्ता के लिए आमंत्रित करने की भी योजना बनाई है।

राजनीतिक समीकरण और सुरक्षा चिंताएं बरकरार

इजराइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने स्पष्ट किया है कि संघर्ष विराम के बावजूद रणनीतिक क्षेत्रों से सुरक्षा बलों की वापसी नहीं होगी। वहीं, इस निर्णय को लेकर देश के भीतर राजनीतिक मतभेद भी उभर आए हैं। विपक्षी नेता यायर लापिड ने सरकार पर समझौते को लेकर नरमी दिखाने का आरोप लगाया है।

लेबनान और हिज्बुल्लाह की प्रतिक्रिया

लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन ने इस पहल के लिए अमेरिका का आभार जताया और इसे क्षेत्रीय शांति के लिए सकारात्मक संकेत बताया। हिज्बुल्लाह के प्रतिनिधि इब्राहिम अल-मौसवी ने कहा कि यदि इजराइल हमले पूरी तरह रोकता है, तो संगठन भी सीजफायर का पालन करेगा। उन्होंने इस प्रक्रिया में ईरान की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया।

वैश्विक समर्थन और रणनीतिक संदेश

लेबनान के प्रधानमंत्री नवाफ सलाम ने संघर्ष विराम का स्वागत करते हुए इसे देश के लिए राहत भरा कदम बताया। यूरोपीय संघ और फ्रांस सहित कई अंतरराष्ट्रीय शक्तियों ने भी इस पहल का समर्थन किया है। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इसे “बेहद सकारात्मक विकास” करार दिया।

आगे की चुनौती: स्थायी शांति या अस्थायी विराम?

विशेषज्ञों का मानना है कि 10 दिन का यह सीजफायर केवल एक अस्थायी राहत है। इस अवधि का उपयोग यदि स्थायी समाधान, निरस्त्रीकरण और सीमा सुरक्षा जैसे मुद्दों पर ठोस प्रगति के लिए किया जाता है, तभी क्षेत्र में दीर्घकालिक शांति संभव हो पाएगी।

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