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Strait of Hormuz की नाकाबंदी, बातचीत की टेबल पर आने को तैयार Iran

The live ink desk.  होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में बढ़ते दबाव और समुद्री नाकाबंदी के बाद पश्चिम एशिया का सामरिक परिदृश्य तेजी से बदलता नजर आ रहा है। अमेरिका द्वारा ईरान के बंदरगाहों के चारों ओर सख्त निगरानी और प्रतिबंधात्मक कदम उठाए जाने के बाद अब दोनों देशों के बीच कूटनीतिक नरमी के संकेत मिलने लगे हैं। ताजा घटनाक्रम में संकेत हैं कि अगले दो दिनों में दोनों पक्ष फिर से वार्ता की मेज पर लौट सकते हैं।

दरअसल, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के आसपास अमेरिकी नौसेना की सक्रियता और ईरानी जहाजों की आवाजाही पर कड़ी निगरानी ने क्षेत्रीय तनाव को चरम पर पहुंचा दिया था। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने इस्लामाबाद में विफल रही शांति वार्ता के बाद कड़ा रुख अपनाते हुए ईरान के समुद्री मार्गों पर नाकाबंदी का ऐलान किया था। साथ ही यह चेतावनी भी दी गई थी कि प्रतिबंधों का उल्लंघन करने वाले किसी भी जहाज के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

हालांकि, इस दबाव का असर अब कूटनीतिक स्तर पर दिखाई देने लगा है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने वार्ता को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी कहा है कि अब आगे बढ़ने की जिम्मेदारी तेहरान पर है। उनका कहना है कि यदि ईरान ठोस प्रस्ताव के साथ आगे आता है तो व्यापक समझौते की संभावना बन सकती है।

सूत्रों के अनुसार, पूर्व वार्ता में अमेरिका ने ईरान के समक्ष 20 वर्षों तक यूरेनियम संवर्धन पर रोक लगाने का प्रस्ताव रखा था। इसके जवाब में ईरान ने संशोधित प्रस्ताव देते हुए इस अवधि को घटाकर पांच वर्ष करने की बात कही है। यह बदलाव दोनों पक्षों के बीच समझौते की संभावनाओं को बल देता है, हालांकि अंतिम सहमति अभी दूर है।

कूटनीतिक सूत्रों का कहना है कि संघर्ष विराम की मौजूदा समयसीमा 21 अप्रैल को समाप्त हो रही है, ऐसे में उससे पहले किसी ठोस समाधान तक पहुंचने के लिए मध्यस्थ देशों ने प्रयास तेज कर दिए हैं। संभावित वार्ता के लिए इस्लामाबाद (Islamabad) के साथ-साथ जिनेवा का नाम भी चर्चा में है। दोनों देशों ने सैद्धांतिक रूप से बातचीत के लिए सहमति जता दी है, हालांकि प्रतिनिधिमंडल के स्तर को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है।

इस बीच, रूस ने भी इस संकट में मध्यस्थता की इच्छा जताई है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि रूस का प्रस्ताव—जिसमें ईरान के संवर्धित यूरेनियम को अपने नियंत्रण में लेने की बात शामिल है—अब भी लागू है और उस पर विचार किया जा सकता है।

अमेरिका की ओर से यह भी संकेत दिए गए हैं कि यदि ईरान परमाणु हथियार कार्यक्रम को सीमित करने पर सहमत होता है, तो उसके साथ सामान्य कूटनीतिक और आर्थिक संबंध बहाल किए जा सकते हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि एक “सामान्य राष्ट्र” के रूप में ईरान की वापसी तभी संभव है जब वह परमाणु हथियारों की दिशा में बढ़ने की महत्वाकांक्षा त्याग दे।

उधर, क्षेत्रीय तनाव को देखते हुए अमेरिका ने अपने सहयोगियों के साथ भी बातचीत तेज कर दी है। विदेश मंत्री स्तर पर इजराइल और लेबनान के प्रतिनिधियों के साथ बैठक प्रस्तावित है, जिसमें हालिया सैन्य गतिविधियों और सुरक्षा चुनौतियों पर चर्चा की जाएगी। गौरतलब है कि हाल के सप्ताहों में हिज़्बुल्लाह द्वारा इजराइल पर किए गए हमलों ने स्थिति को और जटिल बना दिया है।

कुल मिलाकर, होर्मुज क्षेत्र में बढ़ते दबाव ने जहां एक ओर टकराव की आशंका बढ़ाई, वहीं दूसरी ओर कूटनीतिक समाधान की दिशा में नई संभावनाएं भी खोल दी हैं। अब निगाहें संभावित वार्ता पर टिकी हैं, जो इस संकट के भविष्य को तय कर सकती है।

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