शिकागो के शहीदों को दी श्रद्धांजलिः रेल के निजीकरण व लेबर कोड पर सवाल

प्रयागराज (आलोक गुप्ता). उत्तर मध्य रेलवे के प्रयागराज जंक्शन स्थित हावड़ा इंड पर नॉर्थ सेंट्रल रेलवे वर्कर्स यूनियन (इंडियन रेलवे इम्प्लाइज फेडरेशन संबद्ध) के बैनर तले रेलवे कर्मचारियों ने 1886 में अमेरिका के शिकागो में 8 घंटे कार्यदिवस की मांग को लेकर शहीद हुए मजदूरों की स्मृति में दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी। कार्यक्रम के दौरान श्रमिक अधिकारों, रेलवे निजीकरण और सेवा शर्तों से जुड़े मुद्दों पर वक्ताओं ने अपनी बात रखी।
नेशनल मूवमेंट टू सेव रेलवे के राष्ट्रीय प्रचार सचिव डॉ. कमल उसरी ने कहा कि देश में 44 श्रम कानूनों को समेटकर 4 श्रम संहिताएं लागू की गई हैं, जिससे ट्रेड यूनियन अधिकारों में कटौती और पंजीकरण प्रक्रिया कठिन हुई है।
आरोप लगाया कि आठ घंटे कार्यदिवस की ऐतिहासिक उपलब्धि को कमजोर करते हुए 12 घंटे काम को वैधानिक रूप देने की कोशिश हो रही है। उन्होंने चारों लेबर कोड खत्म करने, रेलवे में सृजित पदों को समाप्त करने के बजाय पुरानी पेंशन योजना (OPS) बहाल करने और NPS/UPS समाप्त करने की मांग की, साथ ही कहा कि जनता के सहयोग से रेलवे के निजीकरण का विरोध जारी रहेगा।
इंडियन रेलवे इम्प्लाइज फेडरेशन के राष्ट्रीय सहायक महासचिव एवं नॉर्थ सेंट्रल रेलवे वर्कर्स यूनियन के केंद्रीय सहायक महामंत्री शिवेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि देश की सबसे बड़ी नियोक्ता भारतीय रेलवे में निजीकरण की प्रक्रिया तेज हो रही है।
शिवेंद्र प्रताप सिंह ने बताया एक अप्रैल 2026 तक कुल 14,80,455 स्वीकृत पदों में से करीब 29,608 पद पुनर्वितरण के लिए चिन्हित किए गए हैं। इसमें उत्तरी रेलवे (3,303), पूर्वी रेलवे (2,544), मध्य रेलवे (2,492), पश्चिमी रेलवे (2,339), दक्षिण पूर्वी रेलवे (1,967), पूर्वी मध्य रेलवे (1,922), उत्तर मध्य रेलवे (1,667), पश्चिम मध्य रेलवे (1,311) और पूर्वोत्तर रेलवे (1,194) शामिल हैं।
उन्होंने बढ़ती बेरोजगारी, संविदा व ठेका प्रथा के विस्तार और औद्योगिक क्षेत्रों—नोएडा, फरीदाबाद, गाजियाबाद, मानेसर—में 12-12 घंटे काम के बावजूद न्यूनतम वेतन न मिलने की स्थिति पर चिंता जताई। कार्यक्रम में शिधार्थ त्यागी, आशीष कुशवाहा, विष्णु श्रीवास्तव, अनुराग, राम बाबू, शीतला प्रसाद, राम किशन, राज करन बिंद, अखिलेश शर्मा, राम मूरत और नितिन सहित अन्य कर्मचारी मौजूद रहे।

