
The live ink desk. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के अंतिम चरण ने मतदान प्रतिशत के लिहाज से नया मानक स्थापित किया है। राजधानी कोलकाता समेत दक्षिण बंगाल के सात जिलों की 142 सीटों पर शाम 5 बजे तक 89.99 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जो पहले चरण के रिकॉर्ड ट्रेंड को आगे बढ़ाता दिखा। इस चरण में 1,448 उम्मीदवारों की किस्मत इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) में कैद हो गई, जबकि छिटपुट हिंसा और तकनीकी गड़बड़ियों ने चुनावी प्रक्रिया पर सवाल भी खड़े किए।
निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, पूर्व बर्धमान जिले में सबसे अधिक 92.46 प्रतिशत मतदान हुआ, जबकि कोलकाता दक्षिण में यह आंकड़ा 86.11 प्रतिशत रहा। हुगली में 90.34%, हावड़ा में 89.44%, कोलकाता उत्तर में 87.77%, नदिया में 90.27%, उत्तर 24 परगना में 89.74% और दक्षिण 24 परगना में 89.57% मतदान दर्ज किया गया। कुल मिलाकर, सात जिलों में मतदाताओं की सक्रिय भागीदारी ने चुनाव को निर्णायक मोड़ पर पहुंचा दिया।
इस चरण का केंद्र बिंदु भवानीपुर सीट रही, जहां मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी आमने-सामने हैं। इसके अलावा मंत्री फिरहाद हकीम, अरूप विश्वास, जावेद खान, सुजीत बसु और शशि पांजा जैसे दिग्गजों के साथ कांग्रेस के शुभंकर सरकार, माकपा की मीनाक्षी मुखर्जी और दीप्शिता धर भी चुनावी मैदान में हैं। भाजपा ने संदेशखाली आंदोलन की चेहरा रेखा पात्र और आरजी कर अस्पताल कांड की पीड़िता की मां रत्ना देवनाथ को उम्मीदवार बनाकर मुकाबले को भावनात्मक आयाम भी दिया है।
सुरक्षा के लिहाज से यह चरण अभूतपूर्व रहा। केंद्रीय बलों की 2,231 कंपनियां—यानी दो लाख से अधिक जवान—तैनात किए गए, जबकि करीब 40 हजार पुलिसकर्मी भी ड्यूटी पर रहे। कोलकाता में सबसे अधिक 274 कंपनियां, पूर्व बर्धमान में 263 और हुगली में 236 कंपनियां तैनात रहीं। इसके अलावा राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने भी संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी रखी।
हालांकि, कड़े सुरक्षा इंतजामों के बावजूद कई स्थानों से तनाव और गड़बड़ी की खबरें आईं। नदिया के चापड़ा में भाजपा एजेंट मुशर्रफ मीर पर हमला हुआ, जबकि कालीघाट में शुभेंदु अधिकारी के दौरे के दौरान तृणमूल और भाजपा समर्थकों के बीच नारेबाजी और झड़प हुई, जिसे नियंत्रित करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। रासबिहारी में कांग्रेस एजेंट को बूथ में प्रवेश से रोके जाने का आरोप लगा।
दक्षिण 24 परगना के भांगड़ में आईएसएफ नेता नौशाद सिद्दिकी के खिलाफ नारेबाजी के बीच तनाव बना रहा, जबकि बासंती में भाजपा प्रत्याशी विकास सरदार पर हमले का आरोप सामने आया। डायमंड हार्बर के फलता में ईवीएम पर टेप लगाए जाने के आरोपों ने राजनीतिक विवाद को और हवा दी, जिस पर भाजपा ने पुनर्मतदान की मांग की है।
तकनीकी स्तर पर भी चुनौतियां सामने आईं। हावड़ा, बारासात, हाबरा, कल्याणी और शांतिपुर समेत कई क्षेत्रों में ईवीएम खराबी के कारण मतदान देर से शुरू हुआ। पूर्व विधायक और अभिनेता चिरंजीत चक्रवर्ती भी तकनीकी कारणों से मतदान नहीं कर सके।
मतदान के बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कालीघाट, चेतला और पद्मपुकुर इलाकों का दौरा कर हालात का जायजा लिया और चुनाव आयोग पर बाहरी पर्यवेक्षकों के जरिए भय का माहौल बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक फैसले बिना राज्य सरकार से परामर्श के लिए जा रहे हैं, जो लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ है।
गौरतलब है कि पहले चरण में 152 सीटों पर 93 प्रतिशत से अधिक मतदान हुआ था। ऐसे में अंतिम चरण के आंकड़े भी उसे टक्कर देते दिख रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह भारी मतदान या तो स्थायित्व की पुष्टि करेगा या फिर सत्ता परिवर्तन का संकेत बन सकता है।



