
The live ink desk. मध्य-पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच ईरान ने दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर सख्त कानून लाने की दिशा में कदम बढ़ा दिया है। प्रस्तावित प्रावधानों से न सिर्फ क्षेत्रीय समीकरण बदल सकते हैं, बल्कि वैश्विक तेल बाजार में भी अस्थिरता बढ़ने की आशंका है।
तेहरान में संसद के उपाध्यक्ष हामिदरेजा हाजी-बाबाई ने संकेत दिए हैं कि नए विधेयक के तहत इज़राइल से जुड़े जहाजों की इस जलमार्ग से आवाजाही पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है। इतना ही नहीं, प्रस्ताव में “दुश्मन देशों” के जहाजों पर आर्थिक दंड और युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई जैसे कड़े प्रावधान भी शामिल किए गए हैं।
सूत्रों के मुताबिक, ईरान अन्य देशों के जहाजों के लिए भी पूर्व अनुमति अनिवार्य करने पर विचार कर रहा है, जिससे इस अंतरराष्ट्रीय मार्ग की स्वतंत्रता पर असर पड़ सकता है। हाजी-बाबाई ने कहा कि “युद्ध के बाद क्षेत्रीय हालात बदल चुके हैं और अब होर्मुज से गुजरने का ढांचा पहले जैसा नहीं रहेगा।”
आंकड़ों में महत्व:
- वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20% हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है
- प्रतिदिन करीब 1.7 से 2.0 करोड़ बैरल कच्चा तेल इस जलडमरूमध्य से ट्रांसपोर्ट होता है
- एशिया, खासकर भारत, चीन और जापान की ऊर्जा निर्भरता इस मार्ग पर अत्यधिक है
इस संभावित कानून से ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हो सकती है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिल सकती है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय पहले ही इस कदम को लेकर चिंता जता चुका है। कई देशों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों पर एकतरफा नियंत्रण या प्रतिबंध समुद्री कानूनों के खिलाफ हो सकता है और इससे वैश्विक व्यापार बाधित होगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम केवल क्षेत्रीय सुरक्षा का मामला नहीं, बल्कि “ऊर्जा राजनीति” का बड़ा संकेत है। यदि कानून लागू होता है, तो इसका असर केवल मध्य-पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था इसकी चपेट में आ सकती है।


