जलशक्ति मंत्री ने दी चेतावनी, 30 दिन में बनाएं जलापूर्ति की व्यवस्था

लखनऊ (विजय मिश्र). उत्तर प्रदेश सरकार ने जल जीवन मिशन के तहत बुंदेलखंड और विन्ध्य क्षेत्र में लंबित जलापूर्ति कार्यों को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। जलशक्ति मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि संबंधित कंपनियां 30 दिनों के भीतर हर घर तक जलापूर्ति सुनिश्चित नहीं कर पाईं, तो उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर अनुबंध समाप्त करने की कार्रवाई की जाएगी।
सोमवार को विन्ध्य और बुंदेलखंड क्षेत्रों में जल जीवन मिशन की प्रगति की समीक्षा करते हुए जलशक्ति मंत्री ने कार्यदायी एजेंसियों को अंतिम अवसर दिया। उन्होंने विशेष रूप से बीजीसीसी और एल एंड टी जैसी कंपनियों के धीमे कार्य पर नाराजगी जताई और कहा कि तय समयसीमा का उल्लंघन किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
समीक्षा बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में मंत्री ने बताया कि कुछ चुनिंदा योजनाओं को छोड़कर अधिकांश परियोजनाओं का कार्य लगभग पूर्ण हो चुका है और बड़ी संख्या में गांवों में शत-प्रतिशत जलापूर्ति शुरू कर दी गई है। हालांकि, लगभग तीन प्रतिशत गांवों में पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने या तकनीकी कारणों से आपूर्ति बाधित है, जिसे तत्काल दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए हैं।
उन्होंने दो टूक कहा कि यदि निर्धारित अवधि में काम पूरा नहीं हुआ, तो दोषी कंपनियों के मालिकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी और कानूनी कार्रवाई के तहत उन्हें जेल भी भेजा जाएगा।
‘जल सारथी ऐप’ से मिलेगी पूरी जानकारी
जल जीवन मिशन के तहत पारदर्शिता और त्वरित शिकायत निस्तारण के उद्देश्य से ‘जल सारथी ऐप’ का शुभारंभ किया गया। इस ऐप के जरिए ग्रामीणों को अपने गांव में जलापूर्ति की स्थिति, परियोजना पर हुए खर्च, निर्माणाधीन योजनाओं की प्रगति, संबंधित अधिकारियों के नाम व संपर्क नंबर की जानकारी मिलेगी। इसके साथ ही लोग सीधे ऐप के माध्यम से जलापूर्ति से जुड़ी शिकायत भी दर्ज करा सकेंगे।
जनप्रतिनिधियों को जानकारी देना अनिवार्य
जलशक्ति मंत्री ने बैठक में मौजूद अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने क्षेत्रों के जनप्रतिनिधियों को योजना की प्रगति, बाधाओं और समाधान की पूरी जानकारी नियमित रूप से दें। निर्देशों की अवहेलना करने वाले अधिकारियों पर भी सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई।
समीक्षा बैठक में अपर मुख्य सचिव नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति विभाग अनुराग श्रीवास्तव, जल निगम ग्रामीण के प्रबंध निदेशक डॉ. राजशेखर, तथा राज्य पेयजल एवं स्वच्छता मिशन के अधिशासी निदेशक प्रभाष कुमार सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

