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एक मार्च से ‘Rail One’ बनेगा रेलवे का ऑल-इन-वन सुपर डिजिटल प्लेटफार्म

रेलवे का डिजिटल एकीकरण: अब एक ही ऐप से जनरल और रिजर्वेशन टिकट

नई दिल्ली. भारतीय रेलवे ने यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए टिकट बुकिंग व्यवस्था में बड़ा डिजिटल बदलाव किया है। अब जनरल और आरक्षित टिकट के लिए अलग-अलग मोबाइल ऐप रखने की आवश्यकता नहीं होगी। रेलवे ने अपने नए सुपर ऐप ‘रेलवन’ (Rail One) को लॉन्च कर दिया है, जिसके माध्यम से सभी प्रकार की रेल टिकट बुकिंग एक ही प्लेटफॉर्म पर संभव होगी। यह व्यवस्था 1 मार्च से प्रभावी हो जाएगी।

रेलवे के इस कदम के बाद वर्षों से उपयोग में आ रहा यूटीएस (UTS) ऐप बंद कर दिया जाएगा। अब अनारक्षित टिकट, आरक्षित टिकट, सीजन टिकट समेत तमाम सेवाएं रेलवन ऐप पर एकीकृत होंगी, जिससे यात्रियों को तकनीकी झंझट से राहत मिलेगी।

डिजिटल टिकट पर छूट, बैलेंस होगा ट्रांसफर

डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से रेलवे ने यात्रियों के लिए विशेष छूट योजना भी लागू की है। 14 जनवरी से 14 जुलाई के बीच रेलवन ऐप (Rail One) से अनारक्षित टिकट बुक करने पर यात्रियों को तीन प्रतिशत की सीधी छूट मिलेगी। इसके अलावा, पुराने यूटीएस ऐप के आर-वॉलेट में मौजूद राशि को रेलवन ऐप में स्थानांतरित किया जा सकेगा, जिससे यात्रियों का पैसा सुरक्षित रहेगा।

टिकट से शिकायत तक,  मिलेंगी सभी सुविधाएं

रेलवन (Rail One) को केवल टिकट बुकिंग तक सीमित नहीं रखा गया है। यह ऐप यात्रियों के लिए एक डिजिटल ट्रैवल असिस्टेंट की तरह कार्य करेगा। जैसे-

  • ट्रेनों की लाइव लोकेशन
  • कोच पोजीशन की जानकारी
  • ई-कैटरिंग के जरिए भोजन बुकिंग
  • ‘रेल मदद’ के माध्यम से शिकायत दर्ज कराने की सुविधा

एक ही जगह उपलब्ध होंगी। यात्रियों को नया अकाउंट बनाने की जरूरत नहीं पड़ेगी, क्योंकि वे पुराने IRCTC या UTS लॉग-इन विवरण से ही इस ऐप में प्रवेश कर सकेंगे।

मोबाइल टिकटिंग 40% तक पहुंचाने का लक्ष्य

रेलवे बोर्ड के अनुसार, देश में मोबाइल टिकटिंग तेजी से लोकप्रिय हो रही है। जहां वर्ष 2023-24 में डिजिटल टिकटिंग की हिस्सेदारी 15–18 प्रतिशत थी, वहीं अब यह बढ़कर 25–28 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। रेलवे का लक्ष्य रेलवन के माध्यम से इस आंकड़े को 40 प्रतिशत तक ले जाना है।

दैनिक यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए रेलवे ने सीजन टिकट (MST) का नवीनीकरण पुराने ऐप पर बंद कर दिया है। अब यह सुविधा केवल रेलवन ऐप के जरिए ही उपलब्ध होगी।

पर्यावरण और सुविधा—दोनों को मिलेगा लाभ

रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यह पहल न केवल यात्रियों के समय और संसाधनों की बचत करेगी, बल्कि कागजी टिकटों की निर्भरता कम कर पर्यावरण संरक्षण में भी सहायक होगी। दक्षिण रेलवे और मुंबई उपनगरीय क्षेत्रों में मोबाइल टिकटिंग पहले ही 29 प्रतिशत का आंकड़ा पार कर चुकी है, जो डिजिटल बदलाव की सफलता को दर्शाता है।

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