
The live ink desk. पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच सऊदी अरब की राजधानी रियाद स्थित अमेरिकी दूतावास को मंगलवार तड़के ड्रोन हमले का सामना करना पड़ा। सऊदी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, वायु रक्षा प्रणाली ने रियाद और अल-खारज क्षेत्र के आसपास संदिग्ध गतिविधि वाले आठ ड्रोन को मार गिराया। प्रारंभिक जांच में पुष्टि हुई है कि इनमें से दो ड्रोन दूतावास परिसर की ओर बढ़े थे, जिनके प्रभाव से इमारत के एक हिस्से में आग लगी और सीमित संरचनात्मक क्षति हुई। किसी बड़े जनहानि की सूचना नहीं है।
सऊदी अधिकारियों ने बताया कि हमले के दौरान प्रिंस सुल्तान एयर बेस की दिशा में बढ़ रहे पांच ड्रोन भी निष्क्रिय कर दिए गए। सुरक्षा एजेंसियां घटनास्थल का फोरेंसिक आकलन कर रही हैं और हमले की तकनीकी प्रकृति की जांच जारी है।
इस घटनाक्रम से एक दिन पूर्व कुवैत और जॉर्डन में स्थित अमेरिकी राजनयिक परिसरों को भी ड्रोन से निशाना बनाए जाने की सूचना मिली थी। कुवैत स्थित दूतावास परिसर में हमले के बाद आग और धुएं के गुबार देखे गए थे, हालांकि स्थानीय प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रण में होने की बात कही थी।
उधर, सऊदी अरब के पूर्वी तट पर स्थित ऊर्जा अवसंरचना भी हमलों की जद में रही। देश की प्रमुख तेल कंपनी Saudi Aramco की रास तानूरा रिफाइनरी पर ड्रोन हमला किया गया। यह प्रतिष्ठान वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण निर्यात टर्मिनल के रूप में जाना जाता है। हमले में सीमित क्षति की पुष्टि हुई है, लेकिन एहतियातन रिफाइनरी का संचालन अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया गया।
क्षेत्रीय परिप्रेक्ष्य में देखें तो अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हालिया सैन्य अभियानों तथा ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मृत्यु के बाद तनाव चरम पर पहुंचा है। तेहरान की ओर से खाड़ी क्षेत्र में रणनीतिक ठिकानों और राजनयिक परिसरों पर हमले तेज किए जाने के संकेत मिल रहे हैं।
सुरक्षा विश्लेषकों का मानना है कि इन घटनाओं से पश्चिम एशिया में अस्थिरता और बढ़ सकती है तथा अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है। स्थिति पर क्षेत्रीय और वैश्विक शक्तियां करीबी निगरानी बनाए हुए हैं।


