
नई दिल्ली. पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का प्रभाव अंतरराष्ट्रीय विमानन परिचालन पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। राष्ट्रीय राजधानी स्थित इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा पर मंगलवार को कुल 80 उड़ानों का संचालन प्रभावित हुआ। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इनमें 36 प्रस्थान (डिपार्चर) और 44 आगमन (अराइवल) उड़ानें शामिल हैं, जिन्हें रद्द किया गया।
विमानन सूत्रों के मुताबिक, क्षेत्रीय हवाई क्षेत्र (एयरस्पेस) में लगाए गए प्रतिबंध और आंशिक बंदी के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है। इजराइल और ईरान के बीच जारी सैन्य टकराव के बाद खाड़ी क्षेत्र के कई देशों ने सुरक्षा कारणों से अपने एयरस्पेस पर नियंत्रण कड़ा कर दिया है। इसके चलते एयरलाइंस को वैकल्पिक मार्ग अपनाने पड़ रहे हैं, जिससे उड़ानों की अवधि, ईंधन लागत और परिचालन जटिलता बढ़ गई है। कुछ कंपनियों ने जोखिम प्रबंधन के तहत चुनिंदा सेक्टरों पर उड़ानें अस्थायी रूप से स्थगित कर दी हैं।
नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अनुसार, पिछले दो दिनों में भारतीय विमानन कंपनियों ने कुल 760 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द की हैं। पश्चिम दिशा—विशेषकर खाड़ी देशों और यूरोप—की ओर संचालित सेवाएं सबसे अधिक प्रभावित हुई हैं। एयरलाइन उद्योग के जानकारों का कहना है कि यदि क्षेत्रीय स्थिति में शीघ्र सुधार नहीं होता, तो आने वाले दिनों में शेड्यूल में और बदलाव संभव हैं।
घरेलू एयरलाइन Akasa Air ने एहतियातन खाड़ी देशों के लिए अपनी सेवाएं 3 मार्च तक निलंबित रखने की घोषणा की है। अन्य एयरलाइंस भी परिस्थिति की दैनिक समीक्षा कर रही हैं और यात्रियों को अपनी उड़ान की स्थिति नियमित रूप से जांचने की सलाह दी गई है।
विमानन विशेषज्ञों के अनुसार, मौजूदा परिदृश्य वैश्विक एविएशन नेटवर्क की परस्पर निर्भरता को रेखांकित करता है, जहां किसी एक क्षेत्र में अस्थिरता का प्रभाव दूरस्थ हवाई अड्डों तक महसूस किया जाता है। यात्रियों को वैकल्पिक यात्रा योजना और अतिरिक्त समय प्रबंधन की सलाह दी जा रही है।



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