MNLU Nagpur: दीक्षांत समारोह में 213विद्यार्थियों को उपाधि, खुशी रावत को दो स्वर्ण

भदोही/नागपुर (संजय सिंह). महाराष्ट्र नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, नागपुर (एमएनएलयू) के चतुर्थ दीक्षांत समारोह का आयोजन गरिमापूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। समारोह में कुल 213 विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गईं, जबकि विभिन्न शैक्षणिक श्रेणियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 25 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस के. वी. विश्वनाथन रहे। विशिष्ट अतिथियों में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस भूषण गवई, सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश एवं विश्वविद्यालय के कुलपति जस्टिस अतुल एस. चांदूरकर, दिल्ली हाई कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस नितिन डब्ल्यू. साम्बरे, बॉम्बे हाई कोर्ट की न्यायमूर्ति जस्टिस भारती एच. डांगरे एवं जस्टिस उर्मिला एस. जोशी-फालके, साथ ही बॉम्बे हाई कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस अनिल एस. किलोर शामिल रहे।


समारोह में विश्वविद्यालय के फाउंडर चांसलर एवं भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस शरद अरविंद बोबडे तथा बॉम्बे हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश आर. सी. चवन् की उपस्थिति भी उल्लेखनीय रही। कार्यक्रम का संचालन कुलपति प्रो. विजेंद्र कुमार ने किया, जबकि विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार एवं जिला जज श्री दीपक एल. भागवत ने औपचारिक उद्घोषणा की।
इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के बांदा जनपद की छात्रा खुशी रावत को बी.ए. एल.एल.बी. (ऑनर्स) इन एडजुडिकेशन एंड जस्टिसिंग पाठ्यक्रम में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए डिग्री के साथ दो स्वर्ण पदक प्रदान किए गए। उन्हें स्वर्ण पदक जस्टिस अतुल एस. चांदूरकर की उपस्थिति में जस्टिस भारती एच. डांगरे एवं जस्टिस उर्मिला एस. जोशी-फालके द्वारा प्रदान किए गए, जबकि एक अन्य स्वर्ण पदक महाराष्ट्र सरकार के एडवोकेट जनरल डॉ. मिलिंदर् साठे ने प्रदान किया। कुलपति प्रो. विजेंद्र कुमार ने भी उन्हें व्यक्तिगत रूप से बधाई दी।
उल्लेखनीय है कि बी.ए. एल.एल.बी. (ऑनर्स) इन एडजुडिकेशन एंड जस्टिसिंग का प्रथम बैच वर्ष 2020 में प्रारंभ हुआ था, जिसकी परिकल्पना जस्टिस शरद अरविंद बोबडे के मार्गदर्शन में की गई थी। इसी पाठ्यक्रम में श्रेष्ठ प्रदर्शन कर खुशी रावत ने दो स्वर्ण पदक अर्जित किए।
खुशी रावत के पिता जिला उपभोक्ता कोर्ट में रीडर हैं। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपने नाना महेश प्रसाद गुप्त, मामा इं. आलोक, मौसा रविंद्र रुसिया, बड़े पापा अनूप रावत (पूर्व स्टेनो सीडीओ), मौसी दिवा तथा माता निशा रावत को दिया।
समारोह में उपस्थित गणमान्य अतिथियों ने सभी स्नातकों को विधि एवं न्याय क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए प्रेरित करते हुए उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। खुशी रावत की उपलब्धि से उनके परिवार के साथ-साथ भदोही और उत्तर प्रदेश का भी गौरव बढ़ा है।




