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यूपी कैबिनेट: गांव-गांव जाएगी रोडवेज बस, ओला-उबर के लिए नया नियम

लखनऊ (विजय मिश्र). उत्तर प्रदेश सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में परिवहन सुविधाओं को मजबूत करने के उद्देश्य से बड़ा निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में राजधानी लखनऊ में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में राज्य की सभी ग्राम सभाओं तक बस सेवा उपलब्ध कराने की योजना को मंजूरी दी गई।

कैबिनेट के फैसले की जानकारी देते हुए वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना और परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने बताया कि “मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना–2026” के तहत प्रदेश की करीब 59,163 ग्राम सभाओं को सार्वजनिक बस सेवा से जोड़ा जाएगा।

12000 गांवों में बस सेवा नहीं

परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने बताया कि फिलहाल लगभग 12 हजार से अधिक गांव ऐसे हैं जहां नियमित बस सेवा उपलब्ध नहीं है। नई योजना के माध्यम से इन क्षेत्रों को भी परिवहन नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। इसके लिए 28 सीट क्षमता वाली छोटी बसों का संचालन किया जाएगा, ताकि संकरी ग्रामीण सड़कों पर भी बसें आसानी से चल सकें।

निजी आपरेटरों से ली जाएगी मदद

योजना के तहत बसों का संचालन निजी ऑपरेटरों के माध्यम से अनुबंध पर किया जाएगा। इन बसों पर परिवहन विभाग की ओर से किसी प्रकार का टैक्स नहीं लगाया जाएगा। प्रत्येक जिले में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में एक समिति गठित की जाएगी, जिसमें क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी सहित अन्य अधिकारी सदस्य होंगे। यही समिति बसों के अनुबंध, संचालन और किराया निर्धारण से जुड़े निर्णय लेगी।

सुविधा के अनुकूल होगी समय सारणी

सरकार के अनुसार बसों की समय-सारणी ग्रामीणों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तय की जाएगी। अधिकांश बसें सुबह गांवों से चलकर ब्लॉक और तहसील होते हुए जिला मुख्यालय तक पहुंचेंगी, जिससे लोगों को सरकारी कार्यालयों, बाजार और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए आने-जाने में सुविधा मिल सके। शाम के समय ये बसें पुनः गांवों की ओर लौटेंगी और रात में वहीं ठहरेंगी।

स्थानीय होंगे चालक और परिचालक

परिवहन मंत्री ने बताया कि बसों में चालक और परिचालक स्थानीय स्तर से रखने की व्यवस्था की जाएगी, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में संचालन सुचारु रूप से हो सके। इस योजना से उन लोगों को विशेष राहत मिलेगी जिन्हें अब तक जिला मुख्यालय पहुंचने के लिए निजी या अवैध वाहनों का सहारा लेना पड़ता था।

टैक्सी सेवा के लिए पंजीकरण जरूरी

कैबिनेट बैठक में ऐप आधारित टैक्सी सेवाओं को लेकर भी नया प्रावधान किया गया है। इसके तहत Ola और Uber जैसी एग्रीगेटर कंपनियों को राज्य में संचालन के लिए पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। बिना पंजीकरण, फिटनेस, चालक के मेडिकल परीक्षण और पुलिस सत्यापन के कोई भी वाहन सेवा संचालित नहीं कर सकेगा।

एग्रीगेटर शुल्क पांच लाख निर्धारित

सरकार के अनुसार एग्रीगेटर कंपनियों को लाइसेंस के लिए पांच लाख रुपये शुल्क जमा करना होगा। हालांकि यह नियम तीन पहिया ऑटो और दोपहिया वाहनों पर लागू नहीं होगा।

सरकार का मानना है कि इन फैसलों से ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन की सुविधा बेहतर होगी, साथ ही परिवहन व्यवस्था अधिक व्यवस्थित और सुरक्षित बन सकेगी।

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