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200+सांसदों की मांगः मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाएं

सांसदों के हस्ताक्षर वाला नोटिस तैयार, सदन में पेश करने की तैयारी

The live ink desk. देश की चुनावी व्यवस्था से जुड़े एक महत्वपूर्ण मुद्दे को लेकर संसद में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दलों के कई सांसदों ने मुख्य चुनाव आयुक्त Gyanesh Kumar को पद से हटाने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए नोटिस पर हस्ताक्षर किए हैं। सूत्रों के अनुसार इस नोटिस पर लोकसभा और राज्यसभा के 200 से अधिक सांसदों के हस्ताक्षर बताए जा रहे हैं और इसे संसद के किसी एक सदन में पेश किए जाने की तैयारी की जा रही है।

जानकारों के अनुसार यदि यह प्रस्ताव औपचारिक रूप से पेश होता है तो यह भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण और दुर्लभ घटनाक्रम होगा, क्योंकि अब तक किसी मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए इस तरह की प्रक्रिया शायद ही शुरू की गई हो।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह प्रक्रिया आगे बढ़ती है तो यह संसद, चुनाव आयोग और राजनीतिक दलों के बीच संवैधानिक विमर्श का एक बड़ा विषय बन सकती है। फिलहाल सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि नोटिस कब और किस सदन में औपचारिक रूप से प्रस्तुत किया जाता है।

हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया

भारत में मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया काफी कठोर और संवैधानिक रूप से संरक्षित है। Election Commission of India के प्रमुख पद पर बैठे व्यक्ति को उसी प्रकार हटाया जा सकता है जैसे Supreme Court of India के न्यायाधीश को हटाया जाता है।

नियमों के अनुसार इस प्रक्रिया की शुरुआत के लिए लोकसभा में कम से कम 100 सांसदों और राज्यसभा में कम से कम 50 सांसदों के हस्ताक्षर आवश्यक होते हैं। मौजूदा मामले में विपक्षी दलों का दावा है कि आवश्यक संख्या से अधिक सांसदों ने नोटिस का समर्थन किया है।

मुख्य चुनाव आयुक्त पर आरोप

सूत्रों के मुताबिक प्रस्ताव में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कई गंभीर आरोपों का उल्लेख किया गया है। इनमें पद पर रहते हुए पक्षपातपूर्ण आचरण, चुनाव संबंधी शिकायतों की जांच में कथित बाधा, और मतदाता सूची से जुड़े मामलों में बड़े पैमाने पर लोगों को मताधिकार से वंचित किए जाने के आरोप शामिल बताए जा रहे हैं।

विपक्षी दलों ने पूर्व में भी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाए हैं और आरोप लगाया है कि आयोग के कुछ फैसले सत्तारूढ़ दल के पक्ष में जाते हैं। हालांकि इन आरोपों पर चुनाव आयोग की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना अभी बाकी है।

विपक्षी दलों की संयुक्त पहल

सूत्रों के अनुसार इस पहल में विभिन्न विपक्षी दलों के सांसद शामिल हैं। बताया जा रहा है कि Indian National Congress सहित कई दलों के सांसदों ने नोटिस पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके अलावा Aam Aadmi Party के सांसदों ने भी इस मुद्दे पर विपक्ष के साथ समर्थन जताया है, हालांकि वह औपचारिक रूप से विपक्षी गठबंधन का हिस्सा नहीं है।

आगे क्या होगी प्रक्रिया

यदि यह नोटिस संसद में प्रस्तुत किया जाता है और संबंधित सदन के अध्यक्ष—लोकसभा में स्पीकर या राज्यसभा में सभापति—इसे स्वीकार कर लेते हैं, तो आरोपों की जांच के लिए एक समिति गठित की जाती है। समिति द्वारा जांच के बाद यदि आरोपों को सही पाया जाता है, तो दोनों सदनों में विशेष बहुमत से प्रस्ताव पारित करना आवश्यक होता है।

इसके बाद ही राष्ट्रपति के पास मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की सिफारिश भेजी जाती है और अंतिम निर्णय राष्ट्रपति द्वारा लिया जाता है।

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